पुलिस स्टेशनों में CCTV की सुस्त रफ्तार पर SC ने केंद्र को लगाई फटकार, कहा- होम सेक्रेटरी को कोर्ट लेकर आइए

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल  ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब केरल का मॉडल बेहतर है, तो अन्य राज्य उसे क्यों नहीं अपना रहे.

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  • सुप्रीम कोर्ट ने देश के थानों में CCTV कैमरों की खराब स्थिति और निगरानी में ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया है.
  • कोर्ट ने केरल के अपडेट सिस्टम की तारीफ करते हुए अन्य राज्यों से इसे अपनाने का सवाल उठाया है.
  • झारखंड में CCTV कैमरों की स्थापना का काम अब तक शुरू नहीं हुआ, जिसे कोर्ट ने गंभीर कमी माना है.
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देश के थानों में CCTV कैमरों की खराब स्थिति और निगरानी में ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार के गृह सचिव (Home Secretary) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है. कोर्ट में बताया गया कि केरल का सिस्टम सबसे बेहतर है, जहां बड़े अधिकारी मोबाइल पर ही थानों की लाइव मॉनिटरिंग कर सकते हैं. जस्टिस नाथ ने सवाल किया कि अगर केरल का सिस्टम इतना अच्छा है, तो बाकी राज्य इसे क्यों नहीं अपना रहे?

झारखंड में सुस्ती

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि झारखंड में तो अभी तक CCTV लगाने का काम शुरू भी नहीं हुआ है, जिसे कोर्ट ने गंभीर कमी माना है. सुनवाई की शुरुआत में अमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ ने कोर्ट को बताया कि अधिकांश राज्यों ने CCTV कैमरे तो लगा दिए हैं, लेकिन मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड सिस्टम बनाने में अभी काफी काम बाकी है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और केरल इस मामले में “बेहद बेहतर” काम कर रहे हैं.

CCTV इंस्टॉलेशन का काम तक शुरू नहीं हुआ

खासतौर पर केरल का सिस्टम सबसे अपडेट है, जहां पुलिस अधिकारी मोबाइल के जरिए रियल-टाइम में थानों की लाइव मॉनिटरिंग कर सकते हैं . हालांकि, झारखंड को लेकर उन्होंने गंभीर कमी बताई और कहा कि वहां CCTV इंस्टॉलेशन का काम तक शुरू नहीं हुआ है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने हालिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए CCTV कैमरों के जरिए जासूसी के खतरे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पड़ोसी देशों से जुड़े कैमरों को हटाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि वे डेटा बाहर भेज रहे हैं. कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर बड़े पैमाने पर कैमरे बदलने पड़े, तो राज्यों के पास इसके लिए बजट और संसाधन कहां से आएंगे.

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'जब केरल का मॉडल बेहतर है, तो...'

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल  ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब केरल का मॉडल बेहतर है, तो अन्य राज्य उसे क्यों नहीं अपना रहे. जस्टिस नाथ ने कहा अगर केरल का सिस्टम सबसे अच्छा है, तो बाकी राज्य उसे क्यों नहीं फॉलो कर सकते? 

धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई और कहा आप कल अपने होम सेक्रेटरी को लेकर आइए. इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर भारत सरकार के गृह सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें, ताकि कोर्ट द्वारा मॉनिटर की जा रही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उचित सहायता मिल सके.

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