Odisha Naxal Free: ओडिशा में वर्षों से चल रहे माओवाद के खिलाफ अभियान अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गया है. एंटी‑नक्सल ऑपरेशन्स (Anti Naxal Operation) के एडीजी संजीव पांडा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि राज्य के माओवाद‑प्रभावित जिले अब पूरी तरह नक्सल‑मुक्त हो चुके हैं. उनके मुताबिक माओवादियों की भर्ती पूरी तरह थम चुकी है और अब केवल मुट्ठीभर उग्रवादी जंगलों में छिपे हुए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार ओडिशा अब धीरे‑धीरे स्थायी शांति की ओर बढ़ रहा है.
Odisha Naxal Free: संजीव पांडा
“ऑपरेशन आसान नहीं था, लेकिन लक्ष्य हासिल हुआ”
एडीजी संजीव पांडा ने अभियान की चुनौतियों को सामने रखते हुए कहा कि माओ विरोधी लड़ाई बिल्कुल भी आसान नहीं थी. खून, साहस और बलिदान से भरे इस लंबे अभियान के बाद आखिरकार सुरक्षा बल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि यह सफलता एक दिन या एक साल की नहीं, बल्कि वर्षों की लगातार कार्रवाई और समन्वय का नतीजा है.
156 माओवादी ढेर या सरेंडर, आंकड़ों में ऑपरेशन की तस्वीर
एडीजी पांडा ने बताया कि कुल 156 माओवादियों को या तो मुठभेड़ों में ढेर किया गया है या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया. इनमें 27 माओवादी मारे गए, 9 गिरफ्तार किए गए, जबकि 78 ने ओडिशा में आत्मसमर्पण किया. इसके अलावा 42 माओवादियों ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में हथियार डाल दिए. इन आंकड़ों से साफ है कि माओ संगठन की कमर लगभग टूट चुकी है.
9 में से 8 जिले पूरी तरह माओमुक्त
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार साल 2025 तक ओडिशा के 9 जिले माओवाद से प्रभावित माने जाते थे, लेकिन अब उनमें से 8 जिले पूरी तरह माओमुक्त हो चुके हैं. केवल कुछ सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में ही अब छिटपुट उपस्थिति बची है. एडीजी ने कहा कि माओवाद अब अपने अंतिम दौर में है और अब कोई बड़ा खतरा शेष नहीं है.
Odisha Naxal Free: संजीव पांडा
शहादत की भारी कीमत, 239 जवान वीरगति को प्राप्त
इस बड़ी सफलता के पीछे भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है. एडीजी संजीव पांडा ने भावुक होते हुए बताया कि माओ विरोधी अभियानों के दौरान 239 जवान शहीद हुए. उन्होंने कहा कि आज ओडिशा के माओमुक्त होने के पीछे इन्हीं शहीदों की कुर्बानी सबसे बड़ा कारण है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.
अब सरेंडर का वक्त खत्म, कड़ी चेतावनी
एडीजी पांडा ने बचे हुए माओवादियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अब आत्मसमर्पण की समयसीमा खत्म हो चुकी है. उन्होंने साफ किया कि जो उग्रवादी अब भी हथियारबंद हैं, उनके खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि ओडिशा में अब माओवादियों की नई भर्ती पूरी तरह बंद हो चुकी है.
अगले दो साल सतर्कता, लेकिन खतरा नहीं
हालांकि एडीजी ने भरोसा दिलाया कि ओडिशा पर अब किसी बड़े माओवादी खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर अगले दो वर्षों तक सुरक्षा अभियान जारी रहेगा. उनका कहना है कि लक्ष्य केवल माओवादी सफाए तक सीमित नहीं, बल्कि स्थायी शांति और सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती भी है.
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