- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों ने ED की जांच में अवैध हस्तक्षेप किया है.
- कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया.
- SC ने स्पष्ट किया कि ED चुनावी कार्यों में दखल नहीं दे सकती, लेकिन राज्य भी एजेंसियों को न रोके.
I-PAC रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला देते हुए माना कि पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों ने ED की जांच में हस्तक्षेप किया. कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार और राज्य पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट टिप्पणी की कि ED के पास चुनावी कार्यों या पार्टी गतिविधियों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. कोर्ट के अनुसार यह मामला, 'देश में कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओं के स्वतंत्र कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है.'
कोर्ट ने माना- TMC ने बुलाई भीड़
बेंच ने अपने आदेश में ED की इस दलील को भी रिकॉर्ड में लिया कि TMC के लीगल सेल ने 9 जनवरी को हाईकोर्ट में भीड़ जुटाने के लिए WhatsApp मैसेज भेजे, जिसके चलते कोर्ट परिसर में अव्यवस्था जैसी स्थिति बनी. SG तुषार मेहता ने इसे 'गंभीर मसला' बताते हुए कहा कि इस गतिविधि में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट को करनी चाहिए.
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'रेड में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का मामला बेहद गंभीर'
कोर्ट ने प्राथमिक दृष्टि से स्वीकार किया कि केंद्रीय एजेंसी की रेड में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का मामला बेहद गंभीर है, और अगर इस तरह की घटनाओं को रोका नहीं गया तो 'कानूनहीनता बढ़ने का खतरा' है. बेंच ने कहा,'अपराधियों को सिर्फ इसलिए संरक्षण नहीं दिया जा सकता कि वे किसी राज्य की एजेंसी के सदस्य हैं.'
'CCTV फुटेज को संभाल कर रखें'
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि सभी CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे की सुनवाई में कोई साक्ष्य प्रभावित न हो. कोर्ट ने दोहराया कि यह मामला केवल एक रेड या टकराव का नहीं, बल्कि कानून के शासन (Rule of Law) के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है.
इसके साथ ही बेंच ने यह भी जोड़ा कि केंद्रीय एजेंसियां चुनावी गतिविधियों में दखल नहीं दे सकतीं, लेकिन यदि जांच से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो राज्य एजेंसियों का उन्हें रोकना भी अस्वीकार्य है. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, 'ED की जांच और उससे जुड़े मामलों में राज्य एजेंसी की बाधा गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी जांच जरूरी है.'













