मास्क उतरे, खतरा नहीं! दिल्ली में हर 100 में से 17 मौतें इंफेक्शन से, रिपोर्ट में डराने वाले आंकड़े

दिल्ली में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट- 2024 के अनुसार, कुल मौतों में करीब 17% मौतें किसी न किसी तरह के इंफेक्शन की वजह से हुई हैं.

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कुल मौतों में करीब 17% मौतें किसी न किसी तरह के इंफेक्शन की वजह से हुई हैं.

कोविड-19 (COVID-19) का दौर भले ही अब पीछे छूटता हुआ नजर आ रहा हो, लेकिन इससे जुड़ा खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है, ऐसा मान लेना एक बड़ी भूल हो सकती है. मास्क हट चुके हैं, लोग सामान्य जिंदगी में लौट आए हैं और कोविड की खबरें भी पहले जैसी सुर्खियों में नहीं रहीं. लेकिन इसके बावजूद, दिल्ली से सामने आए ताज़ा सरकारी आंकड़े एक गंभीर सच्चाई की ओर इशारा करते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में आज भी इंफेक्शन और संक्रामक बीमारियां बड़ी संख्या में लोगों की जान ले रही हैं.

दिल्ली में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट- 2024 के अनुसार, कुल मौतों में करीब 17% मौतें किसी न किसी तरह के इंफेक्शन की वजह से हुई हैं. यह स्थिति साफ संकेत देती है कि कोविड के बाद भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है और हमें अब भी सतर्क रहने की जरूरत है.

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2023 और 2024 के आंकड़े क्या कहते हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में दिल्ली में कुल मौतों में लगभग 16% मौतें इंफेक्शन से जुड़ी थीं. वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 17% तक पहुंच गया. यह बढ़ोतरी भले ही देखने में छोटी लगे, लेकिन बड़े स्तर पर यह हजारों जिंदगियों से जुड़ा मामला है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शहरी लाइफस्टाइल, प्रदूषण, तनाव और अनियमित दिनचर्या इम्यूनिटी को कमजोर कर रही है, जिससे सामान्य इंफेक्शन भी जानलेवा बन सकता है.

कोविड के बाद भी क्यों बना हुआ है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड के दौरान और बाद में कई लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हुई है. बुजुर्ग आबादी की संख्या बढ़ रही है और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज जैसी बीमारियां भी आम हो गई हैं. ये सभी स्थितियां इंफेक्शन के खतरे को बढ़ाती हैं.

इसके अलावा, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक बड़ी समस्या बन चुकी है. बिना डॉक्टर की सलाह दवाइयां लेने की आदत के कारण कई बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम हो गया है, जिससे सामान्य इंफेक्शन का इलाज भी मुश्किल होता जा रहा है.

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हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे करें बचाव?

  • डॉक्टरों का कहना है कि इंफेक्शन को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत या लंबे समय तक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज और सही दवा जान बचा सकती है.
  • साथ ही, टीकाकरण पूरा रखना, हाथों की साफ-सफाई, साफ पानी और संतुलित भोजन बेहद जरूरी है. बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचें.
  • विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पब्लिक हेल्थ सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है, ताकि इंफेक्शन की समय पर पहचान हो सके और मौतों की संख्या को कम किया जा सके.

कोविड भले ही बीते कल की बात लगने लगा हो, लेकिन इंफेक्शन का खतरा आज भी हमारे आसपास मौजूद है. सतर्कता, सही जानकारी और जिम्मेदार व्यवहार ही हमें और हमारे परिवार को सुरक्षित रख सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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