29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. ऐसे में गर्भवती महिलाओं के मन में सवाल आता है कि क्या उन्हें ये व्रत रखना चाहिए. इसी को लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से उनके सत्संग में सवाल किया. आइए जानते हैं इस पर महाराज ने क्या कहा.
गर्भावस्था में सबसे बड़ा व्रत है शिशु का पोषण
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि गर्भस्थ शिशु का पूरा पोषण मां के खानपान पर निर्भर करता है. मां जो खाती-पीती हैं, उसी से बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं. ऐसे में अगर गर्भवती महिला निर्जला या कठोर व्रत रखेगी, तो शिशु के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही उनका कहना था कि गर्भावस्था के दौरान महिला का प्रमुख धर्म और सबसे बड़ा व्रत यही है कि वो गर्भस्थ शिशु का सही पोषण करे, ताकि वो स्वस्थ जन्म ले और आगे चलकर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नागरिक बन सके.
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पूजा-पाठ करें
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को अपनी स्थिति का ध्यान रखना चाहिए. साथ ही उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में माताएं भगवान का नाम-स्मरण करें, कथा सुनें, कीर्तन करें और पूजा-पाठ करें, लेकिन भोजन और आवश्यक पोषण से समझौता न करें. उनके अनुसार गर्भस्थ शिशु की देखभाल भी एक प्रकार की ईश्वर सेवा है. इसलिए अगर स्वास्थ्य की दृष्टि से व्रत उचित नहीं है, तो बाहरी आराधना के माध्यम से भी भक्ति की जा सकती है.
करवा चौथ की तिथि
पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर दिन गुरुवार को रखा जाएगा. वहीं, पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:38 बजे से 06:56 बजे तक रहेगा.
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