विधानसभा चुनाव 2025
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2025 Assembly Elections All Your Questions Answered
2025 में किन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं?
देश की राजधानी दिल्ली में साल 2025 में सबसे पहले विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान और 8 फरवरी को मतगणना होगी. वहीं इसी साल बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा के चुनाव कराए सकते हैं. बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं. इस साल लोकसभा की और विधानसभा की छह के लिए उपचुनाव भी कराया जा सकता है. जिन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें उत्तर प्रदेश की एक, जम्मू कश्मीर की दो और गुजरात, केरल और तमिलनाडु विधानसभा की एक-एक सीट शामिल हैं. पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट पर इस साल उपचुनाव हो सकता है.
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कब डाले जाएंगे वोट?
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 5 फरवरी और मतगणना 8 फरवरी को होगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी है और नामांकन पत्रों की जांच 18 जनवरी तक की जाएगी. उम्मीदवार 20 जनवरी तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे. दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त हो जाएगा. उससे पहले नई सरकार का गठन होना है.
दिल्ली में कितनी विधानसभा सीटें हैं?
दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं. चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच है. पिछले विधानसभा चुनाव में आप को 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं बीजेपी को 8 सीटों पर जीत मिली थी. कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई थी.
आदर्श आचार संहिता क्या है और यह कब लागू होती है?
आदर्श आचार संहिता का पालन चुनावों को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रत्याशियों, राजनीतिक दलों और सरकारों को करना होता है. इनमें सरकारी घोषणाएं करने पर रोक होती है. साथ ही कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार किसी को लुभाने के लिए मुफ्त में कोई गिफ्ट नहीं दे सकता. केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है.
EVM क्या है? VVPATs क्या हैं?
वोट दर्ज करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, यानी EVM कहते हैं. इसमें दो इकाइयां होती हैं. एक के माध्यम से वोट दर्ज कराए जाते हैं, जिसे मतदान इकाई कहते हैं, जबकि दूसरे से इसे नियंत्रित किया जाता है, जिसे कंट्रोल यूनिट कहा जाता है. नियंत्रण इकाई मतदान अधिकारी के पास होती है, वहीं मतदाता इकाई मतदान कक्ष के भीतर रखी जाती है.
वर्ष 2010 से ही निर्वाचन आयोग EVM में तीसरी इकाई VVPAT, यानी वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल को चरणबद्ध तरीके से जोड़ रहा है, जिसके ज़रिये मतदाता को एक रसीद हासिल होती है, जिससे यह पता चल जाता है कि उसका वोट सही प्रत्याशी के नाम दर्ज हुआ है या नहीं.

क्या EVM पर भरोसा किया जा सकता है?
चुनाव आयोग का कहना है कि EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं है और यह बिल्कुल सटीक हैं. पिछले कुछ सालों में EVM पर कई बार सवाल उठाए जाते रहे हैं. ज़्यादातर मौकों पर EVM को लेकर सवाल उन्हीं पार्टियों ने उठाए हैं, जो चुनाव हार गईं. हालांकि चुनाव जीतने पर यही पार्टियां इसी तरह के सवालों को नहीं उठातीं.
चुनाव आयोग ने इस संदर्भ में लोगों के सभी संदेहों को दूर करने के लिए पिछले साल 'हैकेथॉन' का आयोजन किया था, लेकिन इसके बाद भी EVM को एक खास पक्ष में इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने उठते रहते हैं.
भारत में मतदाताओं की बहुत बड़ी संख्या को देखते हुए EVM को छोड़ देने की संभावना बेहद कम है. विशेषज्ञों का कहना है कि मतपेटियों की तुलना में EVM में गड़बड़ियों के अवसर कम होते हैं, क्योंकि मतपेटियों को चुरा लेने, बदल दिए जाने और नष्ट कर देने की ख़बरें आम हुआ करती थीं.
चुनाव आयोग ने मतपत्र के स्थान पर EVM का इस्तेमाल कब शुरू किया था? EVM से मतदान के बाद मतगणना में कितना समय लगता है?
EVM का पहली बार इस्तेमाल मई, 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव के दौरान 50 मतदान केंद्रों पर किया गया था. बड़े पैमाने पर EVM का पहली बार इस्तेमाल वर्ष 1998 में किया गया था. जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों पर EVM का इस्तेमाल किया गया. वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव ऐसा पहला चुनाव था, जब पूरे देश के सभी केंद्रों पर EVM का इस्तेमाल किया गया.
EVM ने मतगणना की प्रक्रिया को कहीं-कहीं तो 10 गुणा तेज़ कर दिया है. पहले प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मतपत्रों की गिनती का काम 30 से 40 घंटे तक चला करता था, लेकिन अब रुझान और परिणाम दो से तीन घंटों में ही मिल जाते हैं.

NOTA क्या है और इसे वोटिंग मशीन में विकल्प के रूप में पहली बार कब इस्तेमाल किया गया? किस राज्य में अब तक सबसे ज़्यादा NOTA वोट डाले गए हैं?
NOTA का अर्थ है - नन ऑफ द एबव, यानी इनमें से कोई नहीं. EVM पर यह मतदान का विकल्प है, जो मतदाताओं को उनके निर्वाचन क्षेत्र में हर उम्मीदवार को अस्वीकार करने की अनुमति देता है. इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अक्टूबर, 2013 में शुरू किया गया था.
वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में, गुजरात में 1.8 प्रतिशत NOTA वोट डाले गए, जो दूसरी सबसे बड़ी संख्या है, जबकि बिहार 2.48 फीसदी NOTA मतों के साथ शीर्ष पर रहा है.
अगर NOTA वोटों की संख्या मुख्य पार्टियों को मिले वोटों की संख्या से ज़्यादा हो, तो क्या होगा?
चुनाव आयोग के अनुसार, भले ही NOTA चुनने वाले मतदाताओं की संख्या किसी भी उम्मीदवार के वोटों की संख्या से अधिक हो, जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा वोट मिलेंगे, उसे निर्वाचित घोषित किया जाएगा.
अगर मुझे मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिल रहा हो, तो मैं क्या करूं, किसके पास मदद के लिए जाऊं?
आप अपने निकटतम चुनाव आयोग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल, यानी www.nvsp.in पर जा सकते हैं.
अगर मेरे पास वोटर आईडी कार्ड (मतदाता पहचानपत्र) नहीं है, तो क्या होगा? मैं अपना पंजीकरण कैसे करूं? क्या मैं ऑनलाइन पंजीकरण भी कर सकता हूं?
भले ही आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है, तो भी आप सरकार द्वारा जारी अधिकतर फोटो पहचानपत्रों की मदद से मतदान कर सकते हैं. इनमें शामिल हैं -
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- केंद्र या राज्य सरकार द्वारा संचालित कंपनियों के कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचानपत्र
- बैंक या डाकघर द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक
- पैन (PAN) कार्ड
- राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) द्वारा जारी किया गया स्मार्टकार्ड
- मनरेगा (MNREGA) जॉब कार्ड
- श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
- तस्वीर के साथ पेंशन दस्तावेज़
- चुनाव मशीनरी द्वारा जारी की गई प्रमाणित फोटोयुक्त मतदाता पर्ची
- सांसदों या विधायकों को जारी किए गए आधिकारिक पहचानपत्र
- आधार कार्ड
अगर आपके पास इनमें से कुछ भी नहीं है, तो आप एक वोटर आईडी कार्ड के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन, दोनों तरीकों से पंजीकरण कर सकते हैं.
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आपको राज्य चुनाव कार्यालय जाना होगा और फॉर्म 6 मांगना होगा. फॉर्म में ज़रूरी जानकारी भरने तथा सभी संबद्ध दस्तावेज़ देने के बाद आप उसे जमा करा देंगे, ताकि आपको उचित समयावधि के भीतर वोटर आईडी कार्ड जारी किया जा सके.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आपको राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल, यानी www.nvsp.in पर जाना होगा.
क्या मैं मताधिकार के लिए अपने आधार कार्ड का उपयोग कर सकता हूं?
हां, यदि आपका नाम मतदाता सूची में है, तो आप मतदान केंद्र जाकर पहचानपत्र के रूप में आधार कार्ड दिखाकर वोट डाल सकते हैं.
क्या मैं पोस्टल बैलट का इस्तेमाल कर मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता हूं?
पोस्टल बैलेट की व्यवस्था कुछ परिस्थितियों में ही मिलती है. यदि आप सेना या सरकार के लिए काम करते हैं या चुनाव की ड्यूटी के लिए अपने राज्य से बाहर तैनात हैं या आपको 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' में रखा गया है.
क्या प्रवासी भारतीयों (NRI) के पास मताधिकार होता है?
हां, यदि उन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल नहीं की है, और वह भारत में अपने निवास स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत होने योग्य हैं.
बेलवेदर सीटें क्या होती हैं?
चुनावी जानकारों के अनुसार 'बेलवेदर' सीटें उन्हें कहा जाता है, जो पिछले कई चुनावों में विजेता पार्टी के लिए वोट करती रही हों, इसलिए इन्हें 'आने वाले मौसम' की भविष्यवाणी करने वाली सीटों की उपमा दी जाती हैं. इन सीटों पर चुनाव प्रचार के शुरुआती दिनों तथा मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों से ही मज़बूत संकेत मिल जाते हैं कि चुनाव का नतीजा क्या होगा.