NEET UG परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से मिलता है. इस प्रक्रिया में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों का आवंटन मुख्य रूप से 15% ऑल इंडिया कोटा (All India Quota-AIQ) और 85% स्टेट कोटा के तहत किया जाता है. कई छात्र इन दोनों कोटा सिस्टम को लेकर भ्रमित रहते हैं. आइए जानते हैं कि MBBS एडमिशन में यह व्यवस्था कैसे काम करती है.
क्या होता है 15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ)
देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 15% MBBS और BDS सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत भरी जाती हैं. इन सीटों की काउंसलिंग Medical Counselling Committee (MCC) कराती है. AIQ के तहत देश का कोई भी NEET योग्य उम्मीदवार, चाहे वह किसी भी राज्य का निवासी हो, आवेदन कर सकता है. सीटों का आवंटन NEET ऑल इंडिया रैंक, उम्मीदवार की पसंद (Choice Filling) और लागू आरक्षण नियमों के आधार पर किया जाता है.
85% स्टेट कोटा क्या है
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85% सीटें संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी के माध्यम से भरी जाती हैं. इन सीटों के लिए अधिकांश राज्यों में डोमिसाइल (निवास) या अन्य पात्रता शर्तें लागू होती हैं. हालांकि, पात्रता और आरक्षण के नियम हर राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए उम्मीदवारों को अपने राज्य की आधिकारिक काउंसलिंग वेबसाइट पर जारी नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए.
निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कैसे होता है
अधिकांश राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी कराती है. वहीं Deemed Universities की MBBS सीटों की काउंसलिंग MCC के माध्यम से होती है. इसलिए आवेदन करने से पहले यह जानना जरूरी है कि जिस कॉलेज में आप प्रवेश लेना चाहते हैं, उसकी काउंसलिंग कौन-सी संस्था आयोजित करती है.
क्या AIQ और स्टेट कोटा दोनों में आवेदन कर सकते हैं
अगर उम्मीदवार संबंधित राज्य की पात्रता शर्तें पूरी करता है, तो वह ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा दोनों की काउंसलिंग में अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कर सकता है. दोनों की आवेदन प्रक्रिया, फीस और समय-सारिणी अलग हो सकती है.
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