CUET UG में उम्मीद से कम अंक आने का मतलब यह नहीं है कि अच्छे कॉलेज में दाखिले का सपना खत्म हो गया. कई केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालय नियमित काउंसलिंग राउंड पूरे होने के बाद खाली बची सीटों को भरने के लिए स्पॉट राउंड (Spot Round) या मॉप-अप राउंड (Mop-Up Round) आयोजित करते हैं. ऐसे में जिन छात्रों को पहले सीट नहीं मिली या जिन्होंने किसी कारणवश प्रवेश नहीं लिया, उनके पास एक और मौका होता है.
क्या होता है CUET स्पॉट राउंड
स्पॉट राउंड काउंसलिंग का अंतिम चरण होता है. जब पहले, दूसरे या तीसरे राउंड के बाद भी कुछ सीटें खाली रह जाती हैं, तब विश्वविद्यालय इन सीटों को भरने के लिए स्पॉट राउंड आयोजित करते हैं. यह राउंड केवल सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करता है और सभी विश्वविद्यालय इसे आयोजित करें, ऐसा जरूरी नहीं है.
कैसे होती है प्रक्रिया
विश्वविद्यालय अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर खाली सीटों की सूची जारी करता है. इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय के भीतर स्पॉट राउंड के लिए आवेदन करते हैं. मेरिट, CUET स्कोर, श्रेणी और सीटों की उपलब्धता के आधार पर सीट आवंटित की जाती है. चयनित छात्रों को दस्तावेज सत्यापन और फीस जमा कर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
कम स्कोर वाले छात्रों के लिए क्यों है खास
स्पॉट राउंड में कई बार सीटें खाली होने के कारण पिछले राउंड की तुलना में कटऑफ कम हो सकती है. ऐसे में जिन छात्रों के अंक अपेक्षाकृत कम हैं, उनके पास भी अच्छे कॉलेज में दाखिला पाने का अवसर बन सकता है. हालांकि यह पूरी तरह सीटों की संख्या, कोर्स की मांग और संबंधित विश्वविद्यालय की मेरिट पर निर्भर करता है.
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