श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से MBBS की मंजूरी वापस लिए जाने की खबर सामने आते ही सबसे ज्यादा चिंता वहां पढ़ रहे छात्रों को लेकर शुरू हो गई. मेडिकल की पढ़ाई वैसे ही लंबी, मुश्किल और मेहनत भरी होती है. ऐसे में अगर बीच रास्ते में कॉलेज की मान्यता रद्द हो जाए तो छात्रों और उनके परिवारों के लिए ये बड़ा झटका होता है. 2025-26 सत्र के लिए 50 सीटों पर एडमिशन के बाद पढ़ाई भी शुरू हो चुकी थी. अचानक हुई कार्रवाई से छात्रों के मन में डर बैठ गया कि कहीं उनका साल बर्बाद न हो जाए.
हालांकि रेगुलेटर की तरफ से जो जानकारी सामने आई है, उससे ये साफ होता है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है.
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NMC ने क्यों वापस ली मंजूरी
नेशनल मेडिकल कमीशन की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने कॉलेज का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया था. इस जांच में इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी की संख्या और अन्य जरूरी मानकों में गंभीर कमियां पाई गईं. इसके अलावा कॉलेज को लेकर NMC को कई शिकायतें भी मिली थीं. इन सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद ये तय किया गया कि संस्थान फिलहाल MBBS छात्रों को पढ़ाने के योग्य नहीं है. इसी वजह से 2025-26 सत्र के लिए दी गई अनुमति वापस ले ली गई.
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पहले से पढ़ रहे छात्रों का क्या होगा?
छात्रों के लिए सबसे राहत वाली बात ये है कि जो स्टूडेंट्स पहले से एडमिशन ले चुके हैं, उन्हें दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट किया जाएगा. ये प्रक्रिया सुपरन्यूमेरेरी सीट्स बनाकर पूरी की जाएगी. इसका मतलब ये है कि किसी भी छात्र को दोबारा नीट या काउंसलिंग की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. उनकी पढ़ाई बिना रुकावट आगे बढ़ेगी.
डिग्री और पढ़ाई पर असर पड़ेगा या नहीं?
रेगुलेटरी नियमों के मुताबिक जब छात्रों को मान्यता प्राप्त सरकारी कॉलेजों में शिफ्ट किया जाता है, तो उनकी MBBS डिग्री पूरी तरह वैध रहती है. छात्रों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और आगे की पढ़ाई या करियर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
विवादों में रहा है कॉलेज
ये कॉलेज पहले भी चर्चा में रहा है, जब पहले बैच में एक समुदाय के ज्यादा छात्रों के दाखिले को लेकर विरोध हुआ था. हालांकि कॉलेज प्रशासन ने साफ किया था कि सभी छात्र जम्मू कश्मीर से ही हैं. अब मंजूरी वापस लिए जाने के बाद ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.
छात्रों के लिए राहत
कुल मिलाकर यह फैसला संस्थान के लिए झटका जरूर है, लेकिन छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है. NMC का ये कदम यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी छात्र की मेहनत और समय बेकार न जाए.
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