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महज 6% ही निकाल पाते हैं UGC NET, सरकार ने बताया हर साल कितने छात्रों को मिलती है JRF

Lok Sabha UGC-NET Update: कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तरफ से लोकसभा में नेट जेआरएफ को लेकर सवाल किया गया था, जिस पर सरकार ने जवाब दिया है. सरकार ने बताया कि हर साल कितने उम्मीदवारों को जेआरएफ मिलती है.

महज 6% ही निकाल पाते हैं UGC NET, सरकार ने बताया हर साल कितने छात्रों को मिलती है JRF
NET JRF को लेकर संसद में दी गई जानकारी

UGC NET एग्जाम की आंसर की और रिजल्ट का हजारों उम्मीदवार इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच संसद में इसे लेकर एक जरूरी आंकड़ा दिया गया है. शिक्षा मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में बताया गया कि देशभर की यूनिवर्सिटीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में से केवल 6 प्रतिशत ही क्वालीफाई होते हैं. इसके साथ ही ये जानकारी भी दी गई कि हर साल कितने उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) दी जाती है. ये जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तरफ से पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में दी. 

हर साल इतने उम्मीदवारों को JRF

सरकार की तरफ से दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि हर साल 11,750 उम्मीदवारों को 'जूनियर रिसर्च फेलोशिप' (JRF) दी जाती है. नेट क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवारों का आंकड़ा मांगने के साथ ही थरूर ने ये भी पूछा था कि क्या JRF की संख्या बढ़ाने या इसकी योग्यता के नियमों में बदलाव की कोई योजना है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या मंत्रालय को इस बात की जानकारी है कि यूजीसी 'नॉन-नेट फेलोशिप'की राशि साल 2006 से अब तक नहीं बढ़ी है और वह सिर्फ 8,000 रुपये प्रति महीने ही बनी हुई है.

शिक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब

मजूमदार ने अपने लिखित जवाब में कहा, "विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के आधार पर JRF प्रदान करता है. NET में शामिल होने वाले 6 प्रतिशत उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए क्वालीफाई करते हैं और इन्हीं सफल उम्मीदवारों में से UGC हर साल 11,750 सीटों के लिए JRF देता है. इसके अलावा, PhD कर रहे स्कॉलर्स की मदद के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और संगठनों की तरफ से भी फेलोशिप दी जाती है. अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांगजनों और सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए स्पेशल फेलोशिप का प्रावधान भी है."

PhD छात्रों के लिए क्या है नियम

सरकार की तरफ से दिए गए जवाब में बताया गया कि पीएचडी स्कॉलर्स विश्वविद्यालयों को अलग-अलग फंडिंग एजेंसियों से मिलने वाले रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जुड़ सकते हैं और अपनी रिसर्च के लिए वित्तीय मदद ले सकते हैं. इसके अलावा, कुछ छात्रों को बिना किसी आर्थिक सहायता के विश्वविद्यालयों में पीएचडी में दाखिला मिलता है. ऐसे छात्रों के लिए यूजीसी ने 'नॉन-नेट फेलोशिप' के रूप में एक स्टाइपेंड देकर आंशिक मदद करने का फैसला किया है.

थरूर ने लगाए आरोप 

शशि थरूर ने केंद्र सरकार की तरफ से दिए गए जवाब के बाद एक्स पर एक पोस्ट किया और कहा कि वो इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने लिखा, ये एक निराशाजनक जवाब है. मंत्रालय का जवाब सिर्फ यूजीसी फेलोशिप के ढांचे की एक सामान्य जानकारी देता है, लेकिन यह उठाए गए मुख्य मुद्दों को सुलझाने में नाकाम रहता है. यूजीसी-नेट पास करने वाले और जेआरएफ पाने वाले उम्मीदवारों का हर साल का डेटा देने के बजाय, सरकार सिर्फ पुरानी योजनाओं और रिसर्च फंडिंग के अन्य जरियों का जिक्र कर रही है." 

JRF बढ़ाने पर नहीं मिला जवाब

थरूर ने आगे ये भी बताया कि उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार ने पास होने वाले उम्मीदवारों और मिलने वाली फेलोशिप के बीच बढ़ते अंतर की समीक्षा की है, या क्या उसकी जेआरएफ बढ़ाने या नियमों में ढील देने की कोई योजना है... लेकिन इसका जवाब नहीं दिया गया. थरूर ने कहा कि 2006 से रुकी हुई 8,000 रुपये की नॉन-नेट फेलोशिप को बढ़ाने पर सरकार पूरी तरह चुप है, जबकि समय-समय पर इसमें बढ़ोतरी होना एक सामान्य बात है.

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