दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फोन कंपनी पर 1.5 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है. दरअसल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा एक छात्र फोन की वजह से ये परीक्षा नहीं दे पाया. जिसके बाद ये मामला आयोग के पास पहुंचा और फैसला छात्र के पक्ष में आया. आयोग ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए रियलमी कंपनी को अभ्यर्थी को मुआवजा देने का निर्देश दिया है. ये मामला जून, 2022 का है.
क्या है पूरा मामला
जून, 2022 में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा अभ्यर्थी पवन एक हादसे का शिकार हो गया और इस हादसे की वजह उसका रियलमी फोन था. आयोग में दर्ज की गई शिकायत के अनुसार जून, 2022 में पवन के पास रखे फोन में अचानक विस्फोट हो गया था. ये धमाका फोन में उस वक्त हुआ जब पवन सो रहा था. हादसे में पवन का हाथ और माथा झुलस गया, जिसके कारण उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वह अगले दिन होने वाली अपनी महत्वपूर्ण परीक्षा नहीं दे पाया.
दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग इस मामले की सुनवाई के दौरान रियलमी कंपनी को संघ लोक पवन को मुआवजा देने का निर्देश दिया है. आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य रश्मि बंसल की पीठ ने पीड़ित कोटि साई पवन की शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंपनी को कुल 1.5 लाख रुपये का हर्जाना भरने का निर्देश दिया. आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ग्राहक को घटिया बैटरी या फोन की आपूर्ति करना कंपनी की गंभीर लापरवाही है, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी.
30 दिन के भीतर देना होगा हर्जाना
आयोग ने पाया कि कंपनी ने अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए, जबकि अस्पताल की रिपोर्ट और जले हुए फोन की तस्वीरों से अभ्यर्थी के आरोपों की पुष्टि हुई. आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह पीड़ित को शारीरिक व मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये, नुकसान की भरपाई के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 25 हजार रुपये का भुगतान करे. कंपनी को यह पूरी राशि एक अक्टूबर, 2022 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 दिन के भीतर चुकानी होगी.
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