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IAF में टू-स्टार रैंक वाली पहली मह‍िला अफसर शक्ति शर्मा कौन?, कभी संभाली सैनिक स्कूल की कमान

शक्ति शर्मा ने भारतीय वायुसेना की एयर वाइस मार्शल बनकर इतिहास रच दिया है. वह सशस्त्र बलों में टू-स्टार रैंक हासिल करने वाली पहली गैर-चिकित्सकीय महिला अधिकारी बनी हैं. आईए जानते हैं शक्ति शर्मा के बारे में. 

IAF में टू-स्टार रैंक वाली पहली मह‍िला अफसर शक्ति शर्मा कौन?, कभी संभाली सैनिक स्कूल की कमान
शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन म‍िला था.
  • शक्ति शर्मा भारतीय सशस्त्र बलों में टू-स्टार रैंक हासिल करने वाली पहली गैर-चिकित्सकीय महिला अधिकारी बनी हैं
  • उन्होंने एक सितंबर 2026 को भारतीय वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभाला है
  • वे भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में 18 जून 1994 को कमीशन प्राप्त करने के बाद टू-स्टार रैंक तक पहुंची हैं

शक्ति शर्मा ने इत‍िहास रच द‍िया. वे सशस्त्र बलों में टू-स्टार रैंक हासिल करने वाली पहली गैर-चिकित्सकीय महिला अधिकारी बनी हैं. शक्ति शर्मा ने 1 स‍ितंबर 2026 को भारतीय वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभाला है. 

भारतीय सशस्त्र बलों (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) में शक्ति शर्मा एयर वाइस मार्शल या इसके समकक्ष पद तक पहुंचने वाली पहली गैर-चिकित्सकीय महिला अधिकारी बन गई हैं. इससे पहले केवल मेडिकल कोर की महिला अधिकारियों ने इस ऊंचाई को छुआ था.

बता दें क‍ि क‍ि शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन म‍िला था. इसके बाद शक्ति शर्मा का सफर  टू-स्टार रैंक अफसर तक पहुंच गया है.  

शक्ति शर्मा के नाम सैनिक स्कूल की पहली महिला प्रधानाचार्य बनने का भी र‍िकॉर्ड है. वे तीनों सेनाओं में पहली महिला अधिकारी थीं, जिन्हें किसी सैनिक स्कूल का प्रिंसिपल बनाया गया था. यह अनूठा रिकॉर्ड तब बना जब उनको हर‍ियाणा के कपूरथला सैनिक स्कूल की संस्‍था प्रधान न‍ियुक्‍त क‍िया था. 

गौरव के साथ आकाश को छू ल‍िया

सैनिक स्‍कूल प्रधानाचार्य पद पर उन्‍होंने अगस्त 2015 से मई 2017 तक इस पद पर सेवा दी हैं. इस दौरान उन्‍होंने अनुशासन, नेतृत्व और देशसेवा के संस्कारों से सैकड़ों युवाओं का मार्गदर्शन किया. बता दें क‍ि भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है-"नभः स्पृशं दीप्तम्" . इसका मतलब गौरव के साथ आकाश को छूना है और शक्ति शर्मा ने इस वाक्‍य को चरितार्थ किया है. 

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