NEET UG MBBS Admission : मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक राहत भरी खबर आई है. अक्सर देखा जाता है कि फर्जीवाड़े या जाली दस्तावेजों के कारण एमबीबीएस (MBBS) की सीटें रद्द हो जाती हैं और फिर वे पूरे साल खाली रह जाती हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.क्योंकि शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि एक भी मेडिकल सीट को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा. चलिए आगे आर्टिकल में जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विस्तार से...
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई सीट धोखाधड़ी (जैसे जाली स्कोरकार्ड या नकली सर्टिफिकेट) की वजह से खाली होती है, तो संबंधित अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे उस सीट को मेरिट लिस्ट में अगले योग्य उम्मीदवार (Next Deserving Candidate) को आवंटित करें.
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस की सीटें एक "कीमती राष्ट्रीय संसाधन" हैं. प्रशासनिक सुस्ती या कागजी कार्रवाई के नाम पर इन सीटों को खाली छोड़ना देश और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है.
फैसले की 4 बड़ी बातें1- अगर किसी छात्र का एडमिशन फर्जीवाड़े के कारण रद्द होता है, तो वेटिंग लिस्ट में बैठे अगले योग्य छात्र को मौका देना होगा.
2- अदालत ने माना कि सीटों को खाली छोड़ना NEET-UG परीक्षा के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है.
3- कोर्ट ने कहा कि अगर धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज हुई है, तब भी अगले योग्य उम्मीदवार को सीट देने से मना नहीं किया जा सकता.
4- यह अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे खाली हुई सीट को मेरिट के आधार पर तुरंत भरें.
छात्रों को कैसे होगा फायदा?अक्सर एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद पता चलता है कि किसी ने गलत तरीके से सीट हासिल की थी. पहले ऐसी सीटें 'वेस्ट' हो जाती थीं, लेकिन इस फैसले के बाद अब मेरिट में आने वाले उन छात्रों को डॉक्टर बनने का मौका मिल सकेगा जो कुछ ही अंकों से चूक गए थे. यह फैसला पारदर्शिता और योग्यता को बढ़ावा देने वाला है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पीछे की कहानी क्या है?
यह मामला NEET-UG 2022 से जुड़ा है. एक मेडिकल संस्थान में फर्जीवाड़े के कारण सीट खाली हुई थी, जिसकी जानकारी संस्थान ने जनवरी 2023 में NMC को दी. हालांकि, NMC ने यह कहते हुए एडमिशन देने से मना कर दिया कि एडमिशन की लास्ट डेट निकल चुकी है.
इसके खिलाफ उम्मीदवार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से छात्र के पक्ष में फैसला आया. बाद में NMC ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. अब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र के हित में फैसला सुनाते हुए कहा है कि प्रशासनिक देरी के कारण किसी योग्य उम्मीदवार की सीट को बर्बाद नहीं किया जा सकता.
बता दें कि इस साल 3 मई को होने वाली नीट यूजी परीक्षा के जरिए पहली बार फिजियोथेरेपी कोर्स में भी दाखिला मिलेगा. इसके अलावा MBBS, BDS और आयुष कोर्सेज में भी इसी के जरिए एडमिशन होगा.
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