जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की गई. इस समीक्षा बैठक में स्कूलों की फीस से लेकर यूनिफॉर्म तक कई बड़े फैसले लिए गए. बैठके के दौरान अभिभावकों की शिकायतों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई. साथ ही शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. सबसे बड़ा फैसला स्कूल फीस वृद्धि से जुड़ा हुआ है. स्कूलों को 7.23 प्रतिशत फीस वृद्धि की अनुमति दी गई है. यानी स्कूल अब बच्चों की फीस अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं.
बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
- समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत फीस वृद्धि की सीमा तय करते हुए इस वर्ष अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक की वृद्धि को मंजूरी दी है, जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर निर्धारित की गई है.
- स्कूल छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं.
- एनसीईआरटी की किताबों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है.
- स्कूलों को यह भी आदेश दिया गया है कि वे फीस वृद्धि से संबंधित सभी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करेंगे. ताकी पारदर्शिता बनी रहे.
- स्कूलों में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के स्विमिंग पूल संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. जहां अनुमति प्राप्त है, वहां छात्रों की सुरक्षा के लिए कोच की नियुक्ति अनिवार्य की गई है.
- बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोई भी विद्यालय 5 वर्षों के भीतर अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा. यदि किसी कारण के ऐसा करना होता है तो समिति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
- साथ ही हर वर्ष पुस्तकों को बदलने पर भी रोक लगाई गई है.
पांच साल तक मिलेगी सजा
अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए समिति ने ईमेल आईडी जारी की है, जहां फीस वृद्धि या अन्य किसी समस्या को दर्ज कराया जा सकता है. शिकायत मिलने पर समिति जांच कर उचित कार्रवाई करेगी. नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान भी तय किया गया है. पहली बार उल्लंघन पर अधिक वसूली गई फीस वापस करने के साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. दूसरी बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीसरी बार में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.
इस बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह, मुख्य कोषाधिकारी शिखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप गोयल, दिल्ली पब्लिक स्कूल ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्य सीमा राय तथा एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के अभिभावक प्रतिनिधि प्रशांत सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे.
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