NEET Paper Leak Controversy : देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG' आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां सफलता के जश्न से ज्यादा धांधली के शोर और हार के मातम की चर्चा हो रही है. 2026 में सामने आए हालिया पेपर लीक मामले ने पहले ही सिस्टम की चूलें हिला दी हैं, लेकिन जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो 2023 और 2024 की कुछ ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो हैरान कर देती हैं और एनटीए (NTA) की काम-काज पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
2024 का केस- 705 अंक लाने वाली टॉपर 12वीं में फेल, सप्लीमेंट्री ने खोली पोल
नीट 2024 की यह घटना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती. गुजरात की एक छात्रा ने नीट परीक्षा में 720 में से 705 अंक हासिल कर सबको चौंका दिया. यह स्कोर इतना बड़ा था कि देश के किसी भी टॉप मेडिकल कॉलेज में उसका दाखिला पक्का था. लेकिन हकीकत तब सामने आई जब 12वीं बोर्ड के नतीजे आए.
हैरानी की बात यह थी कि नीट में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाली यह छात्रा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे मेन सब्जेक्ट्स में फेल हो गई. उसे अपनी साख बचाने के लिए जून में सप्लीमेंट्री परीक्षा का सहारा लेना पड़ा, लेकिन वहां भी किस्मत ने साथ नहीं दिया. फिजिक्स में उसे केवल 22 नंबर मिले. एक छात्रा जो नीट के जटिल सवालों को हल कर 705 नंबर ले आई, वह बोर्ड के बेसिक पेपर में पासिंग मार्क्स तक नहीं जुटा पाई. जो किन नीट परीक्षा की शुचिता पर गहरा सवाल खड़ा कर देती है.
2023 का केस : नीट की बलि चढ़ते मासूम सपने और बिखरते परिवार
वहीं, जहां एक तरफ धांधली की खबरें सिस्टम को चिढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नीट का दबाव छात्रों की जान ले रहा है. 2023 में चेन्नई से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था. 19 साल के जगदीश्वरन ने दो बार नीट में असफल होने के बाद अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. गम इतना गहरा था कि बेटे की मौत के दो दिन बाद पिता ने भी सुसाइड कर लिया.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए नीट प्रणाली पर कड़ा प्रहार किया था. उन्होंने इसे 'कोल्ड हार्टेड' वाला सिस्टम करार दिया, जो मासूमों की जान की कीमत नहीं समझता.
2026 Paper Leak: इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
साल 2026 में एक बार फिर नीट-यूजी पेपर लीक मामले ने छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है. 2024 की संदिग्ध टॉपर और 2023 की पिता-पुत्र की हत्या यह बताती हैं कि समस्या सिर्फ एक साल की नहीं है, बल्कि यह साल दर साल गहराती जा रही है.
आपको बता दें कि नीट परीक्षा केवल एक 'एंट्रेंस एग्जाम' नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीद है. सरकार और एनटीए को अब केवल स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि ठोस समाधान पर काम करना होगा ताकि फिर किसी को अपनी जान न देनी पड़े और न ही किसी संदिग्ध टॉपर की कहानी पर हमें शर्मिंदा होना पड़े.
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