नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सबसे पहले आवाज उठाने वाले राजस्थान के सीकर में पढ़ाने वाले केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार ने NDTV से सुपर एक्सक्लूसिव बातचीत में पूरे घटनाक्रम, अपने डर, संघर्ष और फैसले के पीछे की कहानी साझा की. शशिकांत सुथार ने बताया कि 3 मई की शाम परीक्षा खत्म होने के बाद उनके मकान मालिक ने उन्हें एक वायरल पेपर दिखाया, जो अलग-अलग वॉट्सऐप ग्रुप्स में शेयर हो रहा था. जब उन्होंने उस पेपर का असली प्रश्नपत्र से मिलान किया तो कैमिस्ट्री के 45 सवाल हूबहू मिले. शुरुआत में उन्हें खुद यकीन नहीं हुआ, इसके बाद उन्होंने अपने बायोलॉजी फैकल्टी सहयोगी को पेपर दिखाया. वहां करीब 90 सवाल मैच हो गए. शशिकांत के मुताबिक उसी पल उन्हें समझ आ गया कि मामला बेहद गंभीर है...
पुलिस ने मांगे सबूत
NDTV से बातचीत में शशिकांत ने कहा, उस समय मेरे मन में सिर्फ एक बात थी कि अगर यह गड़बड़ हुई है और चुप रहे तो लाखों मेहनती छात्रों के साथ धोखा होगा. उन्होंने बताया कि उसी रात वे सीकर के उद्योग नगर थाने पहुंचे थे. हालांकि पुलिस ने उनसे लिखित शिकायत और साक्ष्य मांगे. इसके बाद अगले चार दिनों तक उन्होंने वायरल पीडीएफ, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत जुटाए.
शशिकांत ने बताया कि इस पूरे मामले में उनके मकान मालिक का सबसे बड़ा सहयोग रहा. उन्हीं के पास सबसे पहले वायरल पेपर की कॉपी पहुंची थी और उन्होंने ही शिकायत दर्ज कराने के लिए लगातार मोटिवेट किया. उन्होंने कहा अगर उस समय मकान मालिक मुझे लगातार नहीं कहते कि इस मामले को आगे बढ़ाना चाहिए तो शायद मैं इतना बड़ा कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता.
मेल के जरिए भेजी शिकायत
इसके बाद सात मई को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय और एनटीए को ई-मेल के जरिए पूरी जानकारी भेजी. शिकायत भेजने के कुछ घंटों के भीतर ही एनटीए और सीबीआई अधिकारियों के फोन आने लगे. अगले दिन गृह मंत्रालय की टीम सीकर पहुंची और उनसे विस्तृत पूछताछ की गई. बाद में राजस्थान एसओजी और स्थानीय पुलिस ने भी उनसे जानकारी ली.
शुरुआत में लग रहा था डर
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उनके मन में डर भी था. उन्हें आशंका थी कि पेपर लीक माफिया उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है. परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता थी. उन्होंने NDTV से कहा कि डर था कि इतने बड़े नेटवर्क के खिलाफ जाने के बाद कहीं परिवार को नुकसान न पहुंचे. लेकिन सीबीआई और राजस्थान एसओजी ने पूरा सहयोग किया. उन्होंने मुझे और परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिया.
छात्रों के लिए दी ये सलाह
नीट परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्रों में निराशा का माहौल है. इस पर शशिकांत सुथार ने कहा कि यह फैसला किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं था. जांच एजेंसियों ने अपने स्तर पर तथ्यों की पड़ताल के बाद निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने से बच्चों का मनोबल जरूर गिरता है. लेकिन अब छात्रों को फिर से अपनी तैयारी में जुटना होगा. मेहनत दोबारा करनी पड़ेगी और बेहतर परिणाम के लिए खुद को तैयार करना होगा.
पूरे कोचिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा करना गलत
पूरे विवाद के दौरान शशिकांत लगातार एक बात दोहराते रहे कि कुछ लोगों की गलती की वजह से पूरे कोचिंग सिस्टम और मेहनती विद्यार्थियों को कटघरे में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि सीकर की पहचान किसी स्कैम से नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों की मेहनत से बनी है. उन्होंने कहा, सीकर के छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं. उनकी सफलता के पीछे अनुशासन और समर्पण है, कोई शॉर्टकट नहीं.
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डॉक्टर बनना चाहते थे शशिकांत
शशिकांत सुथार मूल रूप से हनुमानगढ़ जिले के नोहर के रहने वाले हैं. उनका सपना खुद डॉक्टर बनने का था. कोटा में तीन साल तक तैयारी भी की लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने बच्चों को मेडिकल की तैयारी करवाने का रास्ता चुना. वर्ष 2015 में वे नोहर लौटे और फोकस कोचिंग सेंटर में पढ़ाना शुरू किया. बाद में उन्होंने ‘सफल' नाम से खुद का कोचिंग सेंटर भी खोला. कुछ समय सवाई माधोपुर के गंगापुर में पढ़ाने के बाद कोविड काल के बाद वे सीकर पहुंचे. कोविड के दौरान उन्होंने “केमिस्ट्री क्रैश” नाम से यूट्यूब चैनल बनाकर ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू की.
अब मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक शशिकांत सुथार के साहस की सराहना हो रही है. कई लोग उन्हें उस शिक्षक के रूप में देख रहे हैं जिसने सवाल उठाने का साहस दिखाया. हालांकि खुद शशिकांत अब भी यही कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ वही किया जो उन्हें एक जिम्मेदार शिक्षक के तौर पर सही लगा.
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