JEE Advanced का रिजल्ट जारी होते ही देशभर के IITs में एडमिशन के लिए काउंसलिंग भी शुरू हो गई. हजारों छात्र इस काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे हैं और अपने मनचाहे आईआईटी में सीट पक्की करने की कोशिश में जुटे हैं. इसी बीच देशभर के 22 IITs को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि यहां 38 फीसदी फैकल्टी पद खाली हैं. यानी सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में हर 10 में से लगभग 4 टीचिंग पद खाली हैं, जो टीचर्स की कमी को साफ दिखाता है.
4 हजार से ज्यादा पद खाली
NDTV ने अलग-अलग संस्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण किया और इससे ये बात सामने आई है कि देश के तमाम आईआईटी में फैकल्टी की भारी कमी है. इस एनालिसिस के मुताबिक, इन 22 IITs में कुल मिलाकर शिक्षकों के 12,198 पद मंजूर हैं, जिनमें से केवल 7,558 पदों पर ही शिक्षक काम कर रहे हैं. इस तरह 4,640 पद खाली हैं, यानी कुल मिलाकर 38.04 प्रतिशत सीटें खाली पड़ी हैं.
इन IITs में शिक्षकों की ज्यादा कमी
आंकड़ों से पता चलता है कि देश के सबसे पुराने और सबसे बड़े कुछ IITs में टीचर्स की कमी बहुत ज्यादा है, जबकि सभी IITs को मिलाकर छात्रों की कुल संख्या 1,35,000 से भी ज्यादा है.
IIT खड़गपुर: यहां सबसे ज्यादा 51.31 प्रतिशत पद खाली हैं. यहां मंजूर किए गए 1,600 पदों में से केवल 779 प्रोफेसर ही काम कर रहे हैं, यानी 821 पद खाली हैं. यानी हर दो में से एक से ज्यादा पद खाली पड़ा है.
IIT (ISM) धनबाद: इस आईआईटी में 48.4 प्रतिशत पद खाली हैं. यहां कुल 781 पदों में से 378 पद खाली पड़े हैं.
IIT गोवा: IIT गोवा में 45.83 प्रतिशत पद खाली हैं.
बाकी IITs का हाल
- IIT गुवाहाटी: 42.23%
- IIT रुड़की: 40.68%
- IIT मंडी: 39.9%
- IIT कानपुर: 39%
- IIT BHU (वाराणसी): 38.48%
- IIT बॉम्बे: 38.36%
- IIT दिल्ली: 38.33%

पुराने संस्थानों में बुरा हाल
पदों की संख्या के हिसाब से देखें, तो कुछ पुराने संस्थानों में बहुत बड़ा गैप है. IIT रुड़की में 300 से ज्यादा, IIT दिल्ली में 300 से ज्यादा, IIT बॉम्बे में लगभग 290 और IIT कानपुर में 260 से ज्यादा पद खाली हैं. तमाम कोशिशों के बावजूद इन बड़े और पुराने संस्थानों में फैकल्टी की भारी कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
फैकल्टी के खाली पदों का कैसे चला पता?
NDTV ने ये पूरा एनालिसिस 'IIT काउंसिल' की वेबसाइट पर अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर किया है. यह डेटा तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद अब्दुल वहाब (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) ने संसद में एक सवाल पूछा था. उन्होंने केंद्र सरकार के बड़े शिक्षण संस्थानों में मंजूर किए गए पदों, काम कर रहे शिक्षकों और खाली पड़े पदों की पूरी जानकारी मांगी थी.
अधिकारियों ने IITs को दिया था निर्देश
एनडीटीवी को मिले शिक्षा मंत्रालय के 28 जनवरी के एक ईमेल से पता चलता है कि अधिकारियों ने सभी IITs को 30 जनवरी तक यह डेटा जमा करने का निर्देश दिया था. इसके बाद 10 मार्च को यह डेटा वेबसाइट पर अपलोड किया गया. इन दस्तावेजों में 22 IITs की जानकारी थी, लेकिन IIT पटना का डेटा इसमें शामिल नहीं था.
जाति के हिसाब से खाली पदों का डेटा
कुल 22 में से सिर्फ 9 IITs ने ही जाति के हिसाब से खाली पदों का ब्योरा दिया है. इनमें गुवाहाटी, रुड़की, धनबाद, गांधीनगर, हैदराबाद, रोपड़, मंडी, तिरुपति और भिलाई शामिल हैं. बाकी संस्थानों ने सिर्फ कुल खाली पदों की संख्या बताई है. जिन 9 IITs ने जाति के आधार पर डेटा दिया है, उनमें SC, ST और OBC कैटेगरी के खाली पद कुल 1,501 खाली पदों में से 888 थे, जो कि लगभग 60% होता है. इनमें सबसे ज्यादा पद OBC श्रेणी (477) के खाली थे, इसके बाद जनरल/सामान्य श्रेणी (443), SC (261), EWS (170) और ST (150) का नंबर था.
नए IITs में नहीं है टीचर्स की कमी
- IIT धारवाड़ में कुल मंजूर पदों में से सिर्फ 1.07 प्रतिशत, यानी केवल 1 पद खाली है
- IIT पलक्कड़ में 5.88 प्रतिशत और IIT रोपड़ में 14.35 प्रतिशत पद खाली हैं
- IIT तिरुपति और IIT भिलाई में भी यह आंकड़ा क्रमशः 14% और 15% के आसपास है
ऐसे पूरी हो रही है टीचर्स की कमी
इस डेटा में 1 जनवरी 2026 तक काम कर रहे एडहॉक (adhoc), गेस्ट (guest), कॉन्ट्रैक्ट (contract) और अस्थायी शिक्षकों की जानकारी भी शामिल है. यानी कुछ संस्थान टीचर्स की कमी को पूरा करने के लिए अस्थायी तौर पर शिक्षकों को रख रहे हैं. इसमें IIT बॉम्बे में सबसे ज्यादा 234 अस्थायी टीचर हैं. IIT मद्रास में 139 और IIT गांधीनगर में 81 ऐसे टीचर काम कर रहे हैं. IIT कानपुर में 55 और IIT दिल्ली में 41 कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स हैं.
एनडीटीवी ने इस मामले पर शिक्षा मंत्रालय से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन खबर छपने तक कोई जवाब नहीं मिला. मंत्रालय का बयान आने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा.
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