विज्ञापन

लाखों की कोचिंग और फिर MBBS की मोटी फीस, डॉक्टर बनने के लिए कितना पैसा बहाते हैं छात्र?

How Much Does It Cost To Become A Doctor : भारत में डॉक्टर बनने का सपना अब सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि बड़ा आर्थिक निवेश भी बनता जा रहा है. NEET की तैयारी से लेकर MBBS की फीस तक, कई परिवारों पर लाखों से करोड़ों रुपये तक का खर्च पड़ रहा है.

लाखों की कोचिंग और फिर MBBS की मोटी फीस, डॉक्टर बनने के लिए कितना पैसा बहाते हैं छात्र?
प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में फीस कई परिवारों की पहुंच से बाहर मानी जाती है.

How Much Does It Cost To Become A Doctor : सफेद कोट पहने या गले में स्टेथोस्कोप लगाए किसी डॉक्टर को देखकर आज भी लाखों छात्रों के मन में गर्व, सम्मान और बड़ा सपना जाग उठता है. भारत में डॉक्टर बनना सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं, बल्कि समाज में सम्मानित और सुरक्षित करियर की पहचान माना जाता है. शायद यही वजह है कि डॉक्टर बनाना लाखों स्टूडेंट्स का सपना होता है. लेकिन इस सपने तक पहुंचने का रास्ता अब सिर्फ कठिन पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गया है. NEET की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और फिर MBBS की भारी फीस ने मेडिकल एजुकेशन को देश के सबसे महंगे करियर रास्तों में शामिल कर दिया है.

खासकर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस सुनकर कई लोग हैरान रह जाते हैं. आइए समझते हैं कि भारत में डॉक्टर बनने के लिए आखिर कितना पैसा खर्च हो सकता है.

NEET कोचिंग में ही खर्च हो जाते हैं लाखों

कोटा, दिल्ली, पटना, हैदराबाद और दूसरे बड़े कोचिंग हब्स में NEET की तैयारी कराने वाले बड़े इंस्टीट्यूट्स की फीस अक्सर 1 लाख से 4 लाख रुपये सालाना तक पहुंच जाती है. इसमें हॉस्टल, खाना, टेस्ट सीरीज और स्टडी मैटेरियल जोड़ दें तो दो साल की तैयारी का कुल खर्च कई बार 5 से 8 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. कई छात्र मेडिकल एंट्रेस के लिए ड्रॉप भी लेते हैं, जिससे खर्च और बढ़ जाता है.

सरकारी मेडिकल कॉलेज अब भी सबसे सस्ता रास्ता

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS फीस बाकी ऑप्शंस की तुलना में काफी कम मानी जाती है. कई राज्यों में सालाना फीस 10 हजार से 1.5 लाख रुपये के बीच रहती है. AIIMS जैसे संस्थानों में कुल फीस बहुत ज्यादा नहीं होती है. लेकिन मुश्किल यह है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित रहती है. पिछले कुछ सालों में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ी तो है, लेकिन कॉम्पिटिशन अब भी बेहद कठिन माना जाता है.

देश भर में लाखों छात्र मेडिकल एंट्रेंस देते हैं, उसकी तुलना में सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट्स बहुत ही कम हैं. ऐसे मे कई काबिल और मेहनती बच्चे की सरकारी कॉलेजों में एडमिशन से महरूम ही रह जाते हैं. ऐसे में कई लोगों को प्राइवेट कॉलेजों की ओर रुख करना पड़ता है, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों की फीस भरना अच्छे-अच्छों के लिए आसान नहीं होता. 

होश उड़ा देगी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस

प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में फीस कई परिवारों की पहुंच से बाहर मानी जाती है. अलग-अलग राज्यों और कोटे के हिसाब से सालाना फीस 7 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक जा सकती है. कई कॉलेजों में पूरे MBBS कोर्स का कुल खर्च 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच जाता है. कुछ संस्थानों में हॉस्टल और दूसरे चार्ज जोड़ने पर खर्च 1.5 करोड़ रुपये तक भी जा सकता है.

MBBS के दौरान छात्रों को हॉस्टल, किताबें, लैब कोट, इक्विपमेंट्स, इंटर्नशिप और रोजमर्रा के खर्च भी उठाने पड़ते हैं. बड़े शहरों में रहने वाले छात्रों के लिए यह खर्च हर साल लाखों रुपये तक पहुंच सकता है. कई परिवार एजुकेशन लोन का सहारा लेते हैं, जिसकी EMI बाद में लंबे समय तक चलती रहती है.

हाल ही में नेशनल मेडिकल कमीशन ने मेडिकल कॉलेजों को फीस को लेकर लगाम कसने संबंधी निर्देश दिए हैं. इसमें इंटर्नशिप पीरियड के लिए अलग ट्यूशन फीस न वसूली जाने को भी कहा गया है. इसे छात्रों और पैरंट्स के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. लेकिन इसे लेकर फिलहाल जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है.

यह भी पढ़ें- NEET Paper Leak 2026: 100% असली पेपर का दावा, Telegram पर चल रहे एग्जाम 'स्कैम' का पूरा खेल

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com