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गर्मी की मार से पढ़ाई हुई बेपटरी, देश के 27 राज्यों में हीटवेव ने छीना बच्चों का सुकून- रिपोर्ट

देश में लगातार बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी पड़ने लगा है.

गर्मी की मार से पढ़ाई हुई बेपटरी, देश के 27 राज्यों में हीटवेव ने छीना बच्चों का सुकून- रिपोर्ट

देश में लगातार बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी पड़ने लगा है. बाल अधिकार संगठन CRY (चाइल्ड राइट्स एंड यू) की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि मई और जून 2026 के दौरान लगभग 10 में से 7 स्कूली बच्चे भीषण गर्मी की वजह से स्कूल या अपनी नियमित गतिविधियों में शामिल नहीं हो सके. 

रिपोर्ट का शीर्षक है- Feeling the Heat: Children's Voices on Heat, Well-Being and Learning in India. इसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 3,096 स्कूली बच्चों की राय शामिल की गई. 

88 फीसदी बच्चों ने कहा- इस बार की गर्मी पहले से ज्यादा थी

सर्वेक्षण में शामिल 88 प्रतिशत बच्चों का कहना था कि 2026 की गर्मी पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक थी. रिपोर्ट में सामने आया कि 68 फीसदी बच्चों ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण उन्हें स्कूल या रोजमर्रा की गतिविधियां छोड़नी पड़ीं. वहीं 76 फीसदी बच्चों ने कहा कि गर्मी के कारण पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया था. 

इस दौरान 47 फीसदी बच्चों ने दोपहर के समय को सबसे अधिक कठिन बताया. 45 प्रतिशत से अधिक बच्चों ने कहा कि स्कूल के समय गर्मी सबसे ज्यादा परेशान करती है. 

बच्‍चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ा असर

रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दिया. सर्वे में शामिल बच्चों में से 63 फीसदी को डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) की समस्या हुई. वहीं 51 फीसदी बच्चों को सिरदर्द की शिकायत रही. 44 प्रतिशत बच्‍चों ने कहा अत्यधिक थकान महसूस होती थी. 

गरीब परिवारों के बच्चों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर गर्मी का असर ज्यादा गंभीर रहा. 71 फीसदी ऐसे बच्चे, जिनके परिवार दिहाड़ी मजदूरी या शारीरिक श्रम पर निर्भर हैं, ने गंभीर गर्मी संबंधी परेशानियों की जानकारी दी. वहीं अन्य परिवारों के 46 प्रतिशत बच्चों ने ऐसी समस्याएं बताईं. 

बच्चों ने साझा किए अपने अनुभव

झारखंड की 17 वर्षीय छात्रा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी वाले दिन कक्षा में बैठकर पढ़ाई करना बेहद मुश्किल हो गया था. उसने कहा कि कक्षा का वातावरण बहुत गर्म था, जल्दी थकान महसूस हो रही थी और शिक्षक की बातें समझने में भी कठिनाई हो रही थी. साथ ही उसे बार-बार प्यास लग रही थी.

विशेषज्ञों ने क्या कहा

CRY की CEO पूजा मरवाहा ने कहा कि तापमान के आंकड़े यह बताते हैं कि मौसम कितना गर्म हो रहा है, लेकिन बच्चे यह बताते हैं कि इसका असर उनके जीवन, पढ़ाई, स्वास्थ्य और परिवार पर किस तरह पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों के अनुभव और सुझाव नीति निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. इन बातों को हीट एक्शन प्लान और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में बच्चों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिल सकें. 

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