NEET पेपर लीक के बाद से ही देशभर में एजुकेशन सेक्टर में रिफॉर्म की मांग उठने लगी, कॉकरोच जनता पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया और जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ. इस प्रदर्शन में देशभर से हजारों छात्र जुटे और आखिरकार सरकार को इन युवाओं की बात माननी पड़ी. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सरकार ने ऐलान किया है कि एजुकेशन रिफॉर्म्स को लेकर एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई गई है, जिसे इंफोसिस के फाउंडर नंदन नीलेकणी हेड करेंगे. आइए जानते हैं कि इस टास्क फोर्स और नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने कौन सी पांच बड़ी चुनौतियां होंगीं.
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल है?
- नंदन नीलेकणी
- पूर्व ISRO चीफ डॉ एस सोमनाथ
- पूर्व आईबी चीफ तपन डेका
- पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
- वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा
पहली चुनौती Gen-Z का भरोसा जीतना
पिछले कुछ सालों में एजुकेशन सेक्टर में हुए तमाम पेपर लीक्स और बाकी चीजों ने Gen-Z के भरोसे को चोट पहुंचाई थी, जिसका असर जंतर-मंतर पर भी देखने को मिला. ऐसे में टास्क फोर्स और नए एजुकेशन मिनिस्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस युवा वर्ग का भरोसा जीतना होगी. युवाओं को ये भरोसा दिलाना होगा कि सरकार उनके लिए काम कर रही है और वर्ल्ड क्लास एजुकेशन की तरफ कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
स्किल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना
नए शिक्षा मंत्री और टास्क फोर्स के सामने दूसरी बड़ी चुनौती डिग्री बनाम स्किल वाली होगी. अब दुनियाभर के देशों में डिग्री से ज्यादा स्किल बेस्ड एजुकेशन पर फोकस हो रहा है, ऐसे में इसके लिए देशभर में ऐसा माहौल और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बड़ी चुनौती है. इस पर ग्रास रूट लेवल से काम करना होगा.
जीरो लीक सिस्टम बनाना
भारत जैसे बड़े देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं में 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं. ऐसे में इतने बड़े वर्ग के लिए एक ऐसा सिस्टम तैयार करना बड़ी चुनौती है, जो पूरी तरह से लीक प्रूफ हो. इसमें OMR सिस्टम को खत्म करना और एआई बेस्ड सेफ डिजिटल असेसमेंट मॉडल को लागू करना अभी चुनौती की तरह है.
मेंटल हेल्थ और कोचिंग कल्चर पर लगाम
एजुकेशन के लिए बनी टास्क फोर्स के सामने एक चुनौती ये भी होगी कि कैसे छात्रों का मेंटल प्रेशर कम किया जाए. कोटा से लेकर मुखर्जी नगर और बाकी जगहों पर करोड़ों के टर्नओवर वाले कोचिंग सेंटर्स का बोलबाला है. ऐसे में छात्रों पर लगातार बेस्ट करने का प्रेशर होता है और इसी दबाव के चलते हर साल सैकड़ों छात्र खुदकुशी भी कर लेते हैं. ऐसे में इस कल्चर पर लगाम लगाने और एंट्रेंस एग्जाम्स की खतरनाक रेस को खत्म करना भी बड़ी चुनौती है. ये सब तभी मुमकिन है, जब सरकार गांव-कस्बों के बच्चों को भी बिना महंगी कोचिंग के उच्च स्तर की एजुकेशन मुहैया कराए.
बोर्ड रिजल्ट और कॉपी चेकिंग के लिए स्टूडेंट फ्रेंडली पोर्टल
हाल ही में सीबीएसई के OSM यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर खूब बवाल हुआ था और शिक्षा मंत्रालय पर सीधे सवाल उठे थे. अब नए शिक्षा मंत्री और टास्क फोर्स के सामने ये भी बड़ी चुनौती है कि अगले साल कैसे मार्किंग सिस्टम को दुरुस्त किया जाए और रिजल्ट बिना किसी गड़बड़ी के जारी हो. कुल मिलाकर तकनीकी स्तर पर पूरे सिस्टम को एरर प्रूफ बनाने पर जोर देना होगा.
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