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CISCE 12th Topper 2026: जमशेदपुर की शांभवी तिवारी बनीं नेशनल टॉपर, शेयर किया सक्सेस मंत्र

CISCE 12th Topper 2026: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने गुरुवार को आईएससी (12वीं) की बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है. इस वर्ष झारखंड की शांभवी तिवारी ने आईएससी 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बायो-साइंस स्ट्रीम से पूरे देश में पहला रैंक हासिल किया है.

CISCE 12th Topper 2026: जमशेदपुर की शांभवी तिवारी बनीं नेशनल टॉपर, शेयर किया सक्सेस मंत्र
पढ़ाई के साथ-साथ शांभवी का एक संतुलित जीवन भी है.

CISCE 12th Topper 2026: झारखंड की बेटी शांभवी तिवारी ने आईसीसी बोर्ड 12वीं की परीक्षा में पूरे देश में टॉप किया है. सरायकेला जिला के आदित्यपुर की रहने वाली शांभवी तिवारी ने 12वीं बायो साइंस में 100 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. शांभवी शुरू से ही पढ़ाई में बेहद तेज रही हैं, उन्होंने कक्षा 10 (आईसीएसई) में भी 98.8% अंक हासिल किए थे. जिससे यह साफ हो गया था कि वे आगे भी बड़ा मुकाम हासिल करेंगी. 12वीं में उन्होंने बायो साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करते हुए इंग्लिश, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए. इतने शानदार परिणाम ने उन्हें देशभर में टॉपर बना दिया. उनकी सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान रहा है.

शांभवी तिवारी ने शेयर किया सक्सेस मंत्र

शांभवी तिवारी ने अपना सक्सेस मंत्र शेयर करते हुए बताया कि वो सेल्फ स्टडी पर फोकस करती हैं. अगर सेल्फ स्टडी सही से की जाए, तो आसानी से एग्जाम में अच्छे अंक  लाए जा सकते हैं.

एगजाम की तैयारी करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

इस सवाल का जवाब देते हुए शांभवी तिवारी ने बताया कि वो स्कूल में जो टीचर पढ़ाते थे, वो घर आकर हर चीज को दोबारा पढ़ती थी. रिवीजन और सेल्फ स्टडी करने से काफी मदद मिलती है. एग्जाम के समय पर हर किसी को अच्छे से सेल्फ स्टडी और रिवीजन करना चाहिए. सेल्फ स्टडी और रिजीवन की मदद से कोई भी अच्छे अंक हासिल कर सकता है. 

पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने के लिए क्या किया?

पढ़ाई के साथ-साथ शांभवी का एक संतुलित जीवन भी है. उन्हें फिल्में देखना और संगीत सुनना काफी पसंद है, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिलता है. वे मानती हैं कि पढ़ाई के बीच थोड़ा मनोरंजन जरूरी होता है, ताकि मन तरोताजा रहे और एकाग्रता बनी रहती है.

क्या है आगे का प्लान?

 शांभवी तिवारी डॉक्टर बनने का सपना देखती हैं.  शांभवी तिवारी ने कहा कि वो लोगों की सेवा करना चाहती हैं. जरूरत के समय किसी की जान बचाना सबसे बड़ा काम होता है. इसी लक्ष्य को पाने के लिए वे दिन-रात मेहनत करती हैं. अपने समय का सही उपयोग करती हैं.

"पढ़ाई को बोझ नहीं समझा"

शांभवी तिवारी के पिता राकेश रमन ऑल इंडिया रेडियो में कार्यरत हैं. जबकि उनकी मां निभा सिंह एक शिक्षिका हैं. दोनों का कहना है कि शांभवी बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और अनुशासित रही हैं. उन्होंने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा, बल्कि हमेशा उसे सीखने और आगे बढ़ने का जरिया माना, शांभवी का सपना आगे चलकर डॉक्टर बनने का है.

Prabhat Kumar की रिपोर्ट

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