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दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा में 'मां की खास ड्रेस' का टोटका! बच्चों के अच्छे रिजल्ट के लिए 'कीपाओ' पहनकर आईं महिलाएं

परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने एआई-बेस्ड नकल-रोधी सिस्टम और स्मार्ट गेट लगाए हैं. इस साल चीनी विश्वविद्यालयों में एआई, रोबोटिक्स और बिना ड्राइवर वाली तकनीक जैसे कई नए और आधुनिक विषय भी शुरू किए जा रहे हैं.

दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा में 'मां की खास ड्रेस' का टोटका! बच्चों के अच्छे रिजल्ट के लिए 'कीपाओ' पहनकर आईं महिलाएं
चीन अपने विश्वविद्यालयों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से ढाल रहा है.

चीन में रविवार से (7 जून ) दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक गाओकाओ (Gaokao) यानी नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम की शुरुआत हो गई है. इस साल इस परीक्षा में रिकॉर्ड 1.29 करोड़ छात्र शामिल हो रहे हैं. छात्रों के भविष्य को तय करने वाले इस एग्जाम के पहले दिन परीक्षा केंद्रों के बाहर एक बेहद खूबसूरत और अनोखा नजारा देखने को मिला.

दरअसल, परीक्षा केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में ऐसी माताएं नजर आईं, जो एक खास पारंपरिक चीनी ड्रेस 'कीपाओ' (Qipao) पहनकर आई थीं. चीन में मान्यता है कि गाओकाओ परीक्षा के दौरान इस ड्रेस को पहनना बच्चों के लिए गुड लक लाता है. अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने और उनकी सफलता के लिए माताओं ने इस खास टोटके का सहारा लिया.

क्या है '' परीक्षा और क्यों है इतनी अहम?

गाओकाओ चीन की नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम है. यह परीक्षा इतनी महत्वपूर्ण है कि इसे छात्रों की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट माना जाता है. इस साल परीक्षा के पहले दिन चीनी भाषा और गणित के पेपर हुए. देश भर में छात्रों की सुविधा के लिए 7,981 परीक्षा केंद्र और करीब 3.48 लाख एग्जाम रूम बनाए गए हैं.

नकल रोकने के लिए AI का पहरा, स्मार्ट ग्लास पर बैन

परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए चीनी प्रशासन ने इस बार बेहद कड़े इंतजाम किए हैं. परीक्षा केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एंटी-चीटिंग सिस्टम और स्मार्ट सिक्योरिटी स्क्रीनिंग गेट लगाए गए हैं. राजधानी बीजिंग में तो छात्रों को स्मार्ट ग्लास, मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच या कोई भी वायरलेस डिवाइस लाने की सख्त मनाही है. परीक्षा कक्ष में जाने से पहले इन सभी चीजों को जमा करना जरूरी है.

प्रशासन ने झोंकी पूरी ताकत

छात्रों को परीक्षा के दौरान कोई परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय सरकारों ने ट्रैफिक कंट्रोल, शोर-शराबा कम करने के इंतजाम और चौबीसों घंटे मेडिकल हेल्प की व्यवस्था की है.

उत्तरी चीन के शानक्सी प्रांत में तो परीक्षा केंद्रों के भीतर कूलिंग और बैकअप ऑडियो सिस्टम तक लगाए गए हैं. वहीं, हुबेई प्रांत से एक दिल छू लेने वाला मामला सामने आया, जहां सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित छात्रा शियाओया की मदद के लिए स्कूल ने खास सपोर्ट टीम बनाई. उसे घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था की गई और पेपर लिखने के लिए 30% अतिरिक्त समय भी दिया गया.

पढ़ाई में भी बड़ा बदलाव 

चीन अपने विश्वविद्यालयों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से ढाल रहा है. यही वजह है कि इस साल छात्रों को कॉलेज में एडमिशन के लिए कई नए और आधुनिक विषय चुनने का मौका मिलेगा. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

एम्बॉडीड इंटेलिजेंस (Embodied Intelligence)

रोबोटिक्स और एआई से जुड़ा एडवांस विषय.

ब्रेन-कंप्यूटर साइंस

दिमाग और कंप्यूटर के कनेक्शन पर रिसर्च.
कम ऊंचाई वाली अर्थव्यवस्था और मैनेजमेंट
मरीन इंटेलिजेंस और बिना ड्राइवर वाली तकनीक (Unmanned Technologies)

विशेषज्ञों का कहना है कि इन नए विषयों को शामिल करने का मकसद देश की रणनीतिक और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करना है, ताकि छात्र भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार हो सकें.

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