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प्राचीन भारत के गुरुकलों में ऐसे कराई जाती थी पढ़ाई, CBSE छात्रों को जरूर करना चाहिए ट्राई

प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति के कुछ तरीके आज भी छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. जानें इनके बारे में. 

प्राचीन भारत के गुरुकलों में ऐसे कराई जाती थी पढ़ाई, CBSE छात्रों को जरूर करना चाहिए ट्राई

Gurukul study method: डिजिटल दौर में पढ़ाई का तरीका तेजी से बदल रहा है. स्मार्ट क्लास, ऑनलाइन कोर्स और डिजिटल नोट्स ने छात्रों के लिए लर्निंग को आसान बना दिया है. हालांकि इन सुविधाओं के बावजूद कई छात्र पढ़ाई में फोकस की कमी, तनाव और कमजोर मेमोरी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं. ऐसे में प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति के कुछ तरीके आज भी छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. जानें इनके बारे में. 

अनुशासन और नियमित अभ्यास

गुरुकुल शिक्षा का सबसे बड़ा आधार था- अनुशासन और नियमित अभ्यास. वहां छात्रों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं दिया जाता था बल्कि उन्हें जीवन कौशल, आत्मनिर्भरता और गहरी समझ विकसित करने की शिक्षा भी दी जाती थी. यही कारण है कि गुरुकुल में सीखी गई बातें लंबे समय तक याद रहती थीं. 

स्व-अध्ययन (Self Study) की आदत 

CBSE छात्रों के लिए गुरुकुल का सबसे उपयोगी तरीका है स्व-अध्ययन (Self Study). गुरुकुल में गुरु केवल मार्गदर्शन देते थे जबकि छात्र स्वयं विषय को समझने और अभ्यास करने का प्रयास करते थे. आज भी यदि छात्र स्कूल या कोचिंग में पढ़ाए गए विषयों को घर आकर दोबारा पढ़ें और खुद से प्रश्न हल करें, तो उनकी समझ काफी बेहतर हो सकती है. 

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रटने की बजाय समझने पर जोर

गुरुकुल में रटने की बजाय समझने पर जोर दिया जाता था. छात्र किसी विषय के पीछे के कारण और सिद्धांत को समझते थे. यही तरीका आज CBSE की कॉन्सेप्ट-बेस्ड शिक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है. गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में अवधारणाओं को समझकर पढ़ने से परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है. 

ध्यान और एकाग्रता का अभ्यास

गुरुकुल की एक और खासियत थी- ध्यान और एकाग्रता का अभ्यास. छात्रों को नियमित रूप से ध्यान लगाने और मन को शांत रखने की शिक्षा दी जाती थी. आज के दौर में मोबाइल, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल कारणों से छात्रों का ध्यान आसानी से भटक जाता है. यदि छात्र रोजाना 10 से 15 मिनट ध्यान या मेडिटेशन करें, तो उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार हो सकता है. 

समय प्रबंधन

समय प्रबंधन भी गुरुकुल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा था. वहां दिनचर्या तय होती थी और हर कार्य निश्चित समय पर किया जाता था. CBSE छात्रों के लिए भी पढ़ाई, खेलकूद और आराम के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. एक अच्‍छा टाइम-टेबल पढ़ाई को अधिक प्रभावी बना सकता है. 

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लेखक के बारे में
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आरती मिश्रा
Contributor
आरती मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में NDTV में कंसलटेंट के रूप में कार्यरत... और पढ़ें
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