What is the difference between Army School and Sainik School : कई पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए ऐसा स्कूल तलाशते हैं, जहां बच्चों को अच्छी एजुकेशन के साथ-साथ डिसिप्लीन भी सिखाया जाए. ऐसे में पेरेंट्स के जहन में सबसे पहले दो नाम आर्मी पब्लिक स्कूल और सैनिक स्कूल का आता है. दोनों ही संस्थान अनुशासन, देशभक्ति और क्वालिटी एजुकेशन के लिए जाने जाते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन दोनों का मैनेजमेंट, उद्देश्य, फीस और एडमिशन प्रोसेस में बड़ा अंतर है. अगर आप भी अपने बच्चे के लिए इनमें से किसी एक स्कूल को सिलेक्ट करना चाहते हैं, तो पहले इनके फर्क को समझ लेना जरूरी है.
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मैनेजमेंट और उद्देश्य में अंतरसैनिक स्कूल ‘सैनिक स्कूल सोसायटी' के अंतर्गत संचालित होते हैं, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है. इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नेशनल डिफेंस एकेडमी के लिए तैयार करना है, ताकि वो आगे चलकर आर्म्ड फोर्सेस में अधिकारी बन सकें. यहां पढ़ाई के साथ आर्मी ट्रेनिंग जैसी एक्टिविटी पर भी खास ध्यान दिया जाता है.
वहीं, आर्मी पब्लिक स्कूल ‘आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी' (AWES) से संचालित होते हैं. इनका मुख्य उद्देश्य सेना के कर्मचारियों और पूर्व सैनिकों के बच्चों को अच्छी और स्टेबल एजुकेशन उपलब्ध कराना है. यहां सामान्य स्कूलों की तरह पढ़ाई होती है. हालांकि डिसिप्लीन का लेवल काफी ज्यादा हाई होता है.
डे स्कूल बनाम बोर्डिंगसैनिक स्कूल पूरी तरह से बोर्डिंग स्कूल होते हैं. छात्रों को कैंपस में रहकर ही पढ़ाई करनी होती है. इससे उनमें आत्मनिर्भरता और अनुशासन अपने आप डेवलप होता है. इसके उलट, आर्मी स्कूल ज्यादातर डे स्कूल होते हैं. छात्र रोज घर से स्कूल आते जाते हैं. इसलिए जो परिवार शहर में रहकर बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए ये मुफीद ऑप्शन है.
एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा फर्कसैनिक स्कूलों में प्रवेश कक्षा 6 और 9 में ‘ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेंस एग्जाम' के जरिए होता है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) आयोजित करती है. चयन पूरी तरह मेरिट और रिजर्वेशन के नियमों के आधार पर होता है. वहीं आर्मी स्कूलों में सेना कर्मियों के बच्चों को प्रायोरिटी मिलती है. खाली सीटों पर आम लोगों के बच्चों को भी मौका मिल सकता है. यहां प्रवेश प्रक्रिया स्कूल स्तर पर होती है. जिसमें रिटन एग्जाम या सीधे एडमिशन का भी ऑप्शन हो सकता है.
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