Compassionate Appointment eligibility : राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें बहू को भी बेटी के बराबर अधिकार देने की बात कही गई है. अदालत ने साफ कर दिया है कि अब ससुर की मृत्यु के बाद बहू को भी उतना ही अधिकार मिलेगा, जितना एक बेटी को मिलता है. इस फैसले के साथ ही ‘बहू और बेटी' के बीच का कानूनी अंतर खत्म हो गया है. ये फैसला बताता है कि परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाली बहू को भी समान अधिकार मिलना चाहिए. कोर्ट के फैसले के बाद ये बात तो साफ हो गई है कि अधिकार मिलना चाहिए लेकिन अब भी कई लोग ये नहीं जानते कि आखिर अनुकंपा नियुक्ति होती क्या है और इसके नियम क्या है. तो चलिए जानते हैं इसके नियम और पात्रता क्या हैं.
क्या होता है अनुकंपा नियुक्ति?
अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान अचानक मृत्यु हो जाती है, तो कई बार उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा जाता है. घर चलाने का जिम्मा अचानक टूट जाता है और रोजमर्रा के खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसी मुश्किल परिस्थिति में परिवार को सहारा देने के लिए सरकार अनुकंपा नियुक्ति की सुविधा देती है. इसका मकसद ये होता है कि परिवार को तुरंत कुछ सहारा मिल सके और उनकी आजीविका बनी रहे. ये कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि जरूरत के समय दी जाने वाली मदद है, ताकि परिवार पूरी तरह टूटने से बच सके और धीरे-धीरे संभल सके.
कैसे मिलती है अनुकंपा नियुक्ति?
राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब पति/पत्नी, बेटा, अविवाहित बेटी, दत्तक संतान के साथ पात्रता की लिस्ट में बहू भी शामिल हो गई है. इसके अलावा विभाग ये भी चेक करता है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है.
कौन कर सकता है आवेदन
पहले इस नौकरी के लिए पति या पत्नी, बेटा, अविवाहित बेटी और दत्तक संतान को ही मौका मिलता था. लेकिन अब राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद बहू को भी इसमें शामिल कर लिया गया है. यानी अगर बहू घर संभाल रही है और परिवार उसी पर निर्भर है, तो उसे भी नौकरी मिल सकती है.
क्या हैं जरूरी शर्तें
- इस नौकरी के लिए आवेदन करते समय परिवार की आर्थिक स्थिति देखी जाती है. अगर परिवार के पास पहले से अच्छी कमाई या संपत्ति है, तो नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है.
- आवेदन करने की भी एक समय सीमा होती है. आमतौर पर कर्मचारी की मौत के 1 से 5 साल के अंदर आवेदन करना जरूरी होता है.
- इसके अलावा, इस नौकरी में वही पद नहीं मिलता जो मृत कर्मचारी के पास था. ज्यादातर लोगों को ग्रुप C या D की नौकरी दी जाती है. जैसे क्लर्क, चपरासी या मल्टी टास्किंग स्टाफ.
क्या था पूरा मामला?
इस मामले की कहानी एक संघर्ष कर रहे परिवार से जुड़ी है. सुंदरी देवी के ससुर PWD में काम करते थे और 19 नवंबर 2016 को ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई. उस समय उनके पति एक गंभीर हादसे के कारण बिस्तर पर थे. ऐसे में घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए सुंदरी देवी ने अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की. इसके बाद 25 मई 2020 को उनके पति का भी निधन हो गया, जिससे परिवार की आर्थिक हालत और खराब हो गई.
इस मामले पर जस्टिस रवि चिरानियां की पीठ ने सुनवाई की और विभाग की दलीलों को खारिज कर दिया. विभाग का कहना था कि बहू को यह नौकरी नहीं दी जा सकती, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि बहू को परिवार का हिस्सा मानना होगा. अदालत ने PWD के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बहू को नौकरी से वंचित करना कानून की भावना के खिलाफ है.
क्यों अहम है ये फैसला
ये फैसला उन परिवारों के लिए काफी मददगार है, जहां बहू ही घर की जिम्मेदारी संभालती है. अब ऐसे परिवारों को सहारा मिलने में आसानी होगी. साथ ही ये फैसला ये भी दिखाता है कि कानून अब समाज की बदलती सोच के साथ आगे बढ़ रहा है.
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