- दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के बगल में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई
- हाईकोर्ट ने दिसंबर में मस्जिद के पास 4047 स्क्वायर यार्ड जमीन पर अतिक्रमण को अवैध घोषित किया था
- दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने बताया कि केवल कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ा, जबकि अधिकांश स्थानीय लोगों ने सहयोग किया
दिल्ली के तुर्कमान गेट की भीड़भाड़ वाली जगह पर 6 जनवरी को दोपहर बाद जब सुरक्षाकर्मी डीटीसी की बस से उतरने लगे, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि करीब 80 साल पुरानी मस्जिद के बगल में बने बैंक्वेट हॉल को तोड़ दिया जाएगा और जवाब में पत्थरबाजी होगी. इसके पीछे वजह भी थी, क्योंकि ये इलाका दिल्ली के सबसे सघन आबादी वाला और व्यस्त बाजार में से एक है. हालांकि इसकी भूमिका 3 जनवरी के बाद से ही बननी शुरू हो गई थी.
पिछले साल दिसंबर में हाईकोर्ट ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के बगल में 4047 स्क्वायर यार्ड जमीन को अवैध घोषित किया था. 3 जनवरी को एमसीडी की छोटी सी टीम ने इलाके का सर्वे किया, लेकिन कार्रवाई इतनी जल्दी होगी, इसका इल्म किसी को नहीं था. 5 जनवरी को फिर एमसीडी के अधिकारी मस्जिद पहुंचे, तब इंतजामिया कमेटी कोई कागजात नहीं दिखा पाई. लेकिन भीड़ बढ़ जाने से एमसीडी की टीम लोकल पुलिस के साथ बैरंग लौट गई.
दूसरे दिन यानि 6 जनवरी को जब इंतजामिया कमेटी स्टे के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा रही थी, तब वहीं से बामुश्किल बीस कदम की दूरी पर बने तुर्कमान चौकी में अधिकारियों की आमद बढ़ रही थी. MCD की लीगल टीम आश्वस्त थी कि स्टे नहीं मिलेगा. शाम होते-होते आसपास के जिलों की पुलिस के वायरलेस बजने लगे. छह बजे तक प्लान तैयार हो चुका था. एक के बाद एक दो बसें तुर्कमान चौराहे पर रुकी और सिक्योरिटी हेयर से लैस RAF की दो बटालियन उतरने लगी. स्थानीय रिपोर्टर हरिकिशन को भी रात नौ बजते-बजते अहसास हो गया कि आज आधी रात अवैध अतिक्रमण हटाया ही जाएगा.
इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने मस्जिद गिराए जाने की अफवाह फैलाकर बुलडोजर की तस्वीर वायरल की गई. दूसरी तरफ MCD के एक दो नहीं बल्कि 30 से ज्यादा बुलडोजर आ चुके थे. वायरल तस्वीर देख रात 11 बजे के बाद लोग इकट्ठा होना शुरू हो गए. फिर जो हुआ वो सुबह तक राष्ट्रीय चैनलों की हेडलाइन बन चुका था.
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पत्थरबाजी के बाद तुर्कमान गेट के अंदर मटिया महल तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद, कई छोटी बड़ी गलियों में सन्नाटा पसरा है, लोग परेशान हैं. कोई पुलिस प्रशासन, तो कोई अपने लोगों को इस पत्थरबाज़ी का ज़िम्मेदार बता रहा है. लेकिन इन सबके बीच नगर निगम दो दिनों में हज़ारों टन मलबा साफ कर अब जमीन की पैमाइश करने में जुटी है.
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तुर्कमान गेट जहां अस्सी फीसदी आबादी मुस्लिम समुदाय की है. पुलिस के डीसीपी निधिन वाल्सन खुद स्वीकार करते हैं कि केवल 100-150 लोगों ने माहौल खराब किया, बाकी इलाके के बहुसंख्यक लोगों का सहयोग रहा. फ़िलहाल स्थानीय लोगों के चेहरे पर तमाम सवाल.. तीन दिनों से बंद रास्तों की तकलीफें.. सोशल मीडिया पर तुर्कमान गेट की खबरों के बीच, फैज-ए-इलाही मस्जिद की मीनारें खामोश हैं, वहीं चर्चाओं का ग़ुबार आसमान में.
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