- सालों से चल रहा था बोर्ड का सरकार से टकराव
- ऐसे सरकार ने अपनाया सख्त रवैया
- खुद की स्वायत्त संस्था की दलील देता था बीसीसीआई
अब से भारतीय क्रिकेटरों को भी राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी (नाडा) की टेस्ट प्रक्रिया से गुजरना होगा. खेल मंत्रालय ने बीसीसीआई को साफ तौर पर बता दिया है कि आचार संहिता के हिसाब से बोर्ड के पास उसके निर्देश मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. इसके बाद बीसीसीआई (BCCI)ने पिछले कई सालों से चले आ रहे टकराव के आगे हथियार डालते हुए इस पर अपनी सहमति दे दी है. इससे पहले तक बीसीसीआई (BCCI) हमेशा से ही नाडा के तहत आने का विरोध करता रहा था. बोर्ड का तर्क था कि नाडा को भारतीय क्रिकेटरों का डोप टेस्ट करने का कोई अधिकार नहीं है.
Not the kind of outcome one would have wanted with play suspended due to rain. We move on to Trinidad next #TeamIndia #WIvIND pic.twitter.com/dL1DDE8wWO
— BCCI (@BCCI) August 8, 2019
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अब तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से इनकार करता आया था और यह सिलसिला कई सालों से चला रहा रा था. बोर्ड का कहना था कि वह स्वायत्त संस्था है और कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है. साथ ही, वह सरकार से फंडिंग भी नहीं लेता. हाल ही में खेल मंत्रालया ने दक्षिण अफ्रीका ए और महिला टीमों के दौरों को मंजूरी रोक दी थी. वहीं, सूत्रों की मानें तो खेल मंत्रालय ने यह भी कह दिया था कि अगर बोर्ड राजी नहीं होता है, तो सितंबर में भारत आने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम को वीसा नहीं दिया जाएगा. और खेल मंत्रालय के इसी फैसले के बाद बीसीसीआई ने एक तरह से हथियार डाल दिए.
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इससे पहले वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा ने) आईसीसी से साफ तौर पर यह सूचित कर दिया था कि बीसीसीआई को नाडा के तहत आना ही होगा. बहरहाल, बीसीसीआई सीईओ राहुल जोहरी से शुक्रवार को मुलाकात के बाद खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने कहा कि बोर्ड ने लिखित में दिया है कि वह नाडा की डोपिंग निरोधक नीति का पालन करेगा और अब सभी क्रिकेटरों का टेस्ट नाडा करेगी. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने हमारे सामने तीन मसले रखे जिसमें डोप टेस्ट किट्स की गुणवत्ता, पैथालाजिस्ट की काबिलियत और नमूने इकट्ठे करने की प्रक्रिया शामिल थी.,
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उन्होंने कहा कि हमने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें उनकी जरूरत के मुताबिक सुविधाएं दी जाएंगी, लेकिन उसका कुछ शुल्क लगेगा. बीसीसीआई दूसरों से अलग नहीं है.
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