
नई दिल्ली:
‘काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन’ (सीआईएससीई) ने सोमवार को कहा कि उसने अपने परीक्षा परिणामों की घोषणा से पहले मॉडरेशन नीति के बारे में सीबीएसई के फैसले का इंतजार किया. सीआईएससीई आईसीएसई और आईएससी परीक्षाएं लेती है. पिछले साल आईसीएसई (10 वीं कक्षा) और आईएससी (12 वीं कक्षा) के परिणाम छह मई को घोषित किए गए थे.
हालांकि, पांच राज्यों - पंजाब, उप्र, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा - में चुनावों को लेकर सीआईएससीई ने परीक्षा कार्यक्रम में कुछ देर की. परिषद के सीईओ गेरी अराथून ने कहा, ' हमने पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले और फिर इस मुद्दे पर सीबीएसई के रूख का इंतजार किया क्योंकि मॉडरेशन नीति को रद्द करने का सैद्धांतिक फैसला 32 बोडरें ने आमराय से किया था,' परिषद ने आज 10 वीं और 12 वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों की घोषणा की. सीबीएसई ने 12 वीं कक्षा के परिणाम की घोषणा कल की थी.
हालांकि, परिणामों की घोषणा का समय पिछले शुक्रवार तक निश्चित नहीं था क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीएसई द्वारा कृपांक देने की नीति को रद्द करने पर रोक लगा दी थी. उच्चतम न्यायालय का रूख करने का विचार करने के बाद सीबीएसई ने इसके खिलाफ फैसला किया क्योंकि इस प्रक्रिया से परिणामों की घोषणा में और देर हो जाती.
गौरतलब है कि कल मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मंत्रालय इस विषय में हस्तक्षेप नहीं करेगा और इस मुद्दे पर अकादमिक फैसला करना बोडरें पर निर्भर है.
हालांकि, पांच राज्यों - पंजाब, उप्र, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा - में चुनावों को लेकर सीआईएससीई ने परीक्षा कार्यक्रम में कुछ देर की. परिषद के सीईओ गेरी अराथून ने कहा, ' हमने पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले और फिर इस मुद्दे पर सीबीएसई के रूख का इंतजार किया क्योंकि मॉडरेशन नीति को रद्द करने का सैद्धांतिक फैसला 32 बोडरें ने आमराय से किया था,' परिषद ने आज 10 वीं और 12 वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों की घोषणा की. सीबीएसई ने 12 वीं कक्षा के परिणाम की घोषणा कल की थी.
हालांकि, परिणामों की घोषणा का समय पिछले शुक्रवार तक निश्चित नहीं था क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीएसई द्वारा कृपांक देने की नीति को रद्द करने पर रोक लगा दी थी. उच्चतम न्यायालय का रूख करने का विचार करने के बाद सीबीएसई ने इसके खिलाफ फैसला किया क्योंकि इस प्रक्रिया से परिणामों की घोषणा में और देर हो जाती.
गौरतलब है कि कल मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मंत्रालय इस विषय में हस्तक्षेप नहीं करेगा और इस मुद्दे पर अकादमिक फैसला करना बोडरें पर निर्भर है.
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