
अगर आपको लगता है कि अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए उसके पाठ को आसान करके उसे समझाने से या फिर आप खुद अभी पढ़ रहे हैं और पाठ को आसान करके पढ़ने की आदत आपमें है, तो इसे बदल लें। किसी भी पाठ को आसान बनाना छात्रों के लिए फायदेमंद नहीं, बल्कि यह उनके सीखने की प्रक्रिया को धीमा करता है। जी हां, हाल ही में कनाडा के एक शोध के अनुसार, छात्र जितनी कठिन समस्या का हल निकालने की कोशिश करते हैं, उन्हें उतना ही बेहतर तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
क्या है नुकसान
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब छात्र अपनी समस्या के बारे में सोचते और मूल्यांकन करते हैं, तो वे बेहतर तरीके से इससे सीख हासिल करते हैं, जो लंबी समय तक उनके जेहन में रहती है। कनाडा के सास्कैचवैन यूनिवर्सिटी से फ्रैड फिलिप्स ने कहा, "जब मैंने पहली बार पढ़ाना शुरू किया था, तो मैंने सोचा था कि एक अध्यापक के तौर पर मेरा काम है, मुश्किल विषयों को आसान बनाना।" फ्रैड ने कहा, "हालांकि, इससे तत्काल परिणाम प्राप्त होते हैं, लेकिन यह आगे के लिए फलदायी नहीं है।" शोधकर्ताओं की टीम ने देखा कि मुश्किल समस्याओं को आसान रूप से सीखने से छात्रों को अधिक मदद नहीं मिलती, लेकिन इसी मुश्किल समस्या को सुलझाना उनके लिए काफी फायदेमंद होता है।
शोध की अहम बातें
इस धारणा को बेहतर तरीके से समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 170 व्यापार विषय के छात्रों को एक शोध में हिस्सा लेने के लिए कहा। इस शोध में छात्रों को कई समस्याओं को सही क्रम में एक श्रृंखला के रूप में हल करने के लिए दिया गया। हालांकि, दूसरे समूह को इन्हीं समस्याओं को उलझा कर हल करने के लिए दिया गया। इसके नतीजतन पहले समूह ने इन समस्याओं को आसानी से तो हल कर दिया, लेकिन दूसरे दौर में उनका प्रदर्शन पहले के मुकाबले कम नजर आया, जबकि दूसरे समूह का प्रदर्शन बेहतर रहा। फ्रैड ने कहा कि इस शोध से यह सामने आया कि मुश्किल समस्याओं को हल करने के लिए किए गए संघर्ष का संपर्क लंबी अवधि तक बरकरार होने वाली स्मृति से रहता है, जो समय के साथ कम नहीं होता। उन्होंने कहा कि मुश्किल को हल करने से सार्थक रूप से सीखने में मदद मिलती है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
क्या है नुकसान
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब छात्र अपनी समस्या के बारे में सोचते और मूल्यांकन करते हैं, तो वे बेहतर तरीके से इससे सीख हासिल करते हैं, जो लंबी समय तक उनके जेहन में रहती है। कनाडा के सास्कैचवैन यूनिवर्सिटी से फ्रैड फिलिप्स ने कहा, "जब मैंने पहली बार पढ़ाना शुरू किया था, तो मैंने सोचा था कि एक अध्यापक के तौर पर मेरा काम है, मुश्किल विषयों को आसान बनाना।" फ्रैड ने कहा, "हालांकि, इससे तत्काल परिणाम प्राप्त होते हैं, लेकिन यह आगे के लिए फलदायी नहीं है।" शोधकर्ताओं की टीम ने देखा कि मुश्किल समस्याओं को आसान रूप से सीखने से छात्रों को अधिक मदद नहीं मिलती, लेकिन इसी मुश्किल समस्या को सुलझाना उनके लिए काफी फायदेमंद होता है।
शोध की अहम बातें
इस धारणा को बेहतर तरीके से समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 170 व्यापार विषय के छात्रों को एक शोध में हिस्सा लेने के लिए कहा। इस शोध में छात्रों को कई समस्याओं को सही क्रम में एक श्रृंखला के रूप में हल करने के लिए दिया गया। हालांकि, दूसरे समूह को इन्हीं समस्याओं को उलझा कर हल करने के लिए दिया गया। इसके नतीजतन पहले समूह ने इन समस्याओं को आसानी से तो हल कर दिया, लेकिन दूसरे दौर में उनका प्रदर्शन पहले के मुकाबले कम नजर आया, जबकि दूसरे समूह का प्रदर्शन बेहतर रहा। फ्रैड ने कहा कि इस शोध से यह सामने आया कि मुश्किल समस्याओं को हल करने के लिए किए गए संघर्ष का संपर्क लंबी अवधि तक बरकरार होने वाली स्मृति से रहता है, जो समय के साथ कम नहीं होता। उन्होंने कहा कि मुश्किल को हल करने से सार्थक रूप से सीखने में मदद मिलती है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
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