यह ख़बर 17 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

भारत ने कहा, विश्व बैंक की ऋण सीमा बढ़े

खास बातें

  • भारत ने कहा कि विश्व बैंक की ऋण सीमा बढ़ाने को कदम उठाए जाने चाहिए क्योंकि विकासशील देशों को इसके संसाधनों के इस्तेमाल में दिक्कत आ रही है।
वाशिंगटन:

भारत ने कहा है कि विश्व बैंक की ऋण सीमा बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए क्योंकि विकासशील देशों को इसके संसाधनों के इस्तेमाल में दिक्कत पेश आ रही है। सचिव (आर्थिक मामलात) आर गोपालन ने विश्व बैंक विकास समिति की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऋण सीमाओं को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है क्योंकि इससे भारत तथा अन्य विकासशील देश विश्व बैंक के संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक को कृषि क्षेत्र में और निवेश करना चाहिए। गोपालन ने कहा कि बैंक की वित्तीय क्षमता में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया एक संकट के बाद दूसरे संकट का सामना कर रही है ऐसे में बैंक को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ानी चाहिए। पहले ईंधन का संकट, फिर खाद्य जिंस और फिर वित्तीय और आर्थिक संकट और अब एक बार फिर ईंधन और खाद्य संकट की तरफ दुनिया बढ़ रही है। गोपालन ने कहा एक के बार आने वाले ये संकट दुनिया से एकजुट होकर इनके प्रतिकूल प्रभाव को दूर करने की मांग कर रहे हैं इसके साथ ही विश्व बैंक समूह को भी चाहिए कि वह पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जिससे न केवल संकट का सामना किया जा सके बल्कि दीघकालिक वृद्धि को भी समर्थन मिल सके। उन्होंने कहा, हमें यह देखकर चिंता है कि अगले साल से बैंक की कर्ज राशि कम होने लगेगी, इस मुद्दे पर हमें अभी और भविष्य में विचार करना चाहिए कि किस तरह हम बैंक के वित्तीय आधार को और व्यापक बना सकते हैं।


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