खास बातें
- जॉलिक ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई को गरीब देशों के लिए मुख्य चुनौती बताया और कहा कि इससे एक पूरी पीढ़ी पर ही नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वाशिंगटन: विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉलिक ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई को गरीब देशों के लिए मुख्य चुनौती बताया और कहा कि इससे एक पूरी पीढ़ी पर ही नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जॉलिक वाशिंगटन में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की संयुक्त बैठक के आखिरी सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। इसी बीच वाशिंगटन में ही जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की एक बैठक में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कुछ देशों में बनी नई सरकार को वित्तीय सहायता देने का फैसला किया गया। जॉलिक ने इस तरह के सहयोग को काफी महत्वपूर्ण बताया। जॉलिक ने मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में हाल में हुए विकास का हवाला देकर कहा कि इससे हाल ही में जारी हुई विश्व विकास रिपोर्ट की प्रासंगिकता साबित हो गई है और यह हमें बताता है कि रिपोर्ट के निष्कर्षों से सरकारों को दिशा निर्देश लेना चाहिए। रिपोर्ट में नागरिक सुरक्षा, न्याय और रोजगार को काफी महत्व दिया गया था। जॉलिक ने विश्व बैंक से भी इस क्षेत्र में सुधार की दिशा में तेजी से कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्थिति में ठहराव आने का इंतजार करने से अवसर हाथ से निकल सकता है। क्रांतिकारी क्षणों में रुक कर इंतजार करने से जीत हाथ से निकल सकती है। बैठक में मध्य पूर्व की अस्थिरता, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और उच्च बेरोजगारी पर भी चर्चा की गई। बैठक में आईएमएफ प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस कान ने युवा वर्ग के बीच उच्च बेरोजगारी दर को चिंता का प्रमुख विषय बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन रोजगार नहीं बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग की बेरोजगारी के लम्बा खिंचने का खतरा है और एक पूरी पीढ़ी ही इसकी चपेट में आ सकती है।