नई दिल्ली:
देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन इंडिया भारत में अपने परिचालन विस्तार के लिए सालाना आधार पर 4,000 से 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करना जारी रखेगी।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी ने यह जानकारी दी। 2007 में भारत में प्रवेश के बाद से कंपनी 55,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। कंपनी की योजना नया स्पेक्ट्रम पाने तथा लाइसेंस के विस्तार के बाद नेटवर्क में निवेश की है।
वोडाफोन इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मार्टिन पीटर्स ने कहा, हम हर साल 4,000 से 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। पिछले कुछ साल से हमने ऐसा ही किया है। इसके साथ ही हमने 3जी स्पेक्ट्रम के लिए 11,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। आप निवेश का यह स्तर कायम रहने की उम्मीद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले छह साल के दौरान अपने टेलीफोन नेटवर्क पर 55,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा सरकार को इतनी ही राशि का भुगतान लाइसेंस शुल्क, कर और स्पेक्ट्रम खरीद के लिए किया है। देश में ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन के उपभोक्ताओं की संख्या 15.4 करोड़ है।
अगस्त माह के आंकड़ों के अनुसार भारतीय मोबाइल बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 18 फीसदी की है। उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से वोडाफोन देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी है। पीटर्स ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह निवेश स्पेक्ट्रम और लाइसेंस विस्तार पर निर्भर करेगा, जिसमें काफी स्पष्टता की जरूरत है।
उन्होंने कहा, मुझे निवेश करने के लिए स्पेक्ट्रम की जरूरत है। यदि मुझे निवेश करना है, तो यह नहीं पता है कि कहां निवेश करें। एक बार स्पेक्ट्रम मिलने के बाद आप निवेश का यह स्तर देखेंगे।