खास बातें
- नार्वे ने कहा है कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में घटे प्रतिकूल घटनाक्रम से टेलीनोर को बेवजह नुकसान पहुंचा है ऐसे में यदि भारत में उसका तीन अरब डॉलर का निवेश विफल होता है तो उसका राजनीतिक असर होगा।
नई दिल्ली: नार्वे ने कहा है कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में घटे प्रतिकूल घटनाक्रम से टेलीनोर को बेवजह नुकसान पहुंचा है ऐसे में यदि भारत में उसका तीन अरब डॉलर का निवेश विफल होता है तो उसका राजनीतिक असर होगा।
नार्वे के व्यापार और उद्योग मंत्री त्रोंद गिसके ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘टेलीनोर केवल एक कंपनी नहीं है बल्कि सरकार के जरिये नार्वे की जनता की इसमें 54 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में यदि इस कंपनी को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसका आगे राजनीतिक क्षेत्र में असर होगा।’’ उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर यह निवेश विफल रहता है तो विदेशी निवेश के मामले में नार्वे की कंपनी के लिये यह संभवत: सबसे बड़ा नुकसान होगा। मेरा मानना है कि ऐसे में यह कहना उपयुक्त होगा कि इससे बेहतर निवेश स्थल के तौर पर भारत के बारे में बनी सोच को प्रभावित करेगा।’’ गिसके टेलीनोर के निदेशक मंडल में नार्वे सरकार के प्रतिनिधि हैं जिसकी यूनिनोर में 67.25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनी यूनिटेक के पास है। उच्चतम न्यायालय के दो फरवरी के निर्णय में 2जी स्पेक्टम के 122 लाइसेंस निरस्त किये गये जिसमें 22 लाइसेंस यूनीनोर के शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नार्वे और भारत का अच्छा द्विपक्षीय संबंध है और उन्होंने उम्मीद जतायी कि जल्दी ही मसले को सुलझा लिया जाएगा। मंत्री ने कहा, ‘‘भारत और नार्वे के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत है और वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। इसका निवेशकों पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है लेकिन सभी मसलों में दोनों सरकारों के बीच सहयोग निरंतर बना हुआ है।’’
गिसके ने कहा ‘‘उच्चतम न्यायालय के लाइसेंस निरस्त करने तथा नई नीलामी की ट्राई की सिफारिश के बाद उत्पन्न स्थिति से भविष्य में भारत से जुड़े रहने के रास्ते में अड़चनें खड़ी हुई हैं।’’ दूरसंचार परिचालन में बने रहने के लिये टेलीनोर को नया लाइसेंस हासिल करना होगा और नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम प्राप्त करना होगा। बहरहाल, कंपनी ने दूरसंचार नियामक ट्राई के नीलामी प्रस्ताव को लेकर चिंता जतायी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पूरे देश के लिये एक मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम के लिये आधार मूल्य 3,622 करोड़ रुपये रखने का सुझाव दिया है। यह ए राजा के कार्यकाल में 2008 में आवंटित 2जी लाइसेंस के आधार मूल्य के मुकाबले 10 गुना अधिक है।
ट्राई की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम 5 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि देश भर में 1800 मेगाहट्र्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की लागत कहीं अधिक होगी। टेलीनोर ने उच्च आधार मूल्य पर आपत्ति जतायी है। गिसके ने कहा कि नार्वे सरकार निर्णय करने के भारतीय संस्थानों के अधिकार का सम्मान करती है लेकिन टेलीनोर तथा यूनिनोर के हितों को नुकसान पहुंचा है जिसमें उसकी कोई गलती नहीं है।