यह ख़बर 11 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

गैर कृषि उपकर पर टाटा मोटर्स की याचिका खारिज

खास बातें

  • उच्चतम न्यायालय ने वाहन क्षेत्र की कंपनी टाटा मोटर्स की गैर कृषि उपकर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय ने वाहन क्षेत्र की कंपनी टाटा मोटर्स की गैर कृषि उपकर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। पुणे, पिंपरी के स्थानीय प्रशासन ने कंपनी पर यह उपकर लगाया है। यहीं पर कंपनी का वाहन विनिर्माण संयंत्र है। टाटा मोटर्स की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति आरवी रविंद्रन तथा एके पटनायक की पीठ ने कहा कि स्थानीय विभाग के पास कंपनी पर गैर कृषि उपकर लगाने का अधिकार है। शीर्ष न्यायालय ने इस बारे में बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को उचित ठहराया जिसमें टाटा के उस दावे को खारिज कर दिया गया था कि कंपनी के संयंत्र पर उपकर नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि यह सरकारी लीज की भूमि पर है। कंपनी ने दलील थी कि विकास प्राधिकरण के किरायेदार या सरकारी लीजधारक को गैर कृषि उपकर नहीं देना होता है। टाटा मोटर्स ने महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम तथा पिंपरी चिंचवाड़ न्यू टाउन विकास प्राधिकरण से अपने कारखाने के लिए यह जमीन 1997 में पट्टे पर ली थी और यहां 1999 में उत्पादन शुरू किया था। हालांकि, 26 फरवरी 2002 को गर कामगार तलाथी, चिखली की स्थानीय ग्राम पंचायत ने कंपनी को नोटिस भेजकर 1996 से 45 लाख रुपये का गैर कृषि उपकर चुकाने को कहा था। कंपनी ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।


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