खास बातें
- टाटा की वजह से सरकार को 4,930 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, वहीं घाटा पहुंचाने वाली सूची में स्वान 2,624 करोड़ रुपये के साथ 7वें स्थान पर है।
नई दिल्ली: स्वान टेलीकाम के प्रवर्तक शाहिद बलवा ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार को स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस आवंटन में जिस भारी भरकम 30,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है, उसमें सबसे अधिक योगदान टाटा का है। बलवा के वकील माजिद मेमन ने विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी की अदालत में कहा, टाटा की वजह से सरकार को 4,930 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, वहीं घाटा पहुंचाने वाली सूची में स्वान टेलीकाम 2,624 करोड़ रुपये के साथ सातवें स्थान पर है। मेमन ने कहा, नुकसान में सबसे ज्यादा योगदान टाटा का है। कोई व्यक्ति इस बात के साथ अदालत आया था कि टाटा पर भी आरोप लगना चाहिए, जिससे इस मामले पर निर्णय निष्पक्ष तरीके से हो सके, पर उस आवेदन को खारिज कर दिया गया और जुर्माना भी लगा दिया गया। नौ आवेदकों के बीच 22 सर्कलों के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे, पर सभी पर आरोप नहीं लगाया गया है। सुनवाई के दौरान बलवा ने खुद करीब पांच मिनट तक दलील दी। बलवा ने कहा कि टाटा ने हिस्सेदारी बेचकर अप्रत्याशित लाभ कमाया। बलवा ने आरोप लगाया कि सिर्फ टाटा ऐसी कंपनी थी जिससे शेयर बेचे। इससे उसे 12,000 करोड़ रुपये मिले, इसमें से 3,000 करोड़ रुपये टाटा संस की जेब में गए। वहीं सिर्फ 9,000 करोड़ रुपये कंपनी में डाले गए। इस बीच, बलवा ने आरोप लगाया है कि सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज दिल्ली की अदालत को नहीं दिखाए हैं। बलवा के वकील मेमन ने एजेंसी के खिलाफ अपने आरोपों को मजबूती देने के लिये तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी तथा तत्कालीन सालिसिटर जनरल के बीच आवंटन नीति में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई निजी बातचीत का उदाहरण दिया। मेमन ने कहा, आवंटन नीति पर विदेश मंत्री और सालिसिटर जनरल के बीच निजी बातचीत हुई थी। सीबीआई को सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष रखने चाहिए।