यह ख़बर 31 अगस्त, 2013 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार : सूचना प्रौद्योगिकी के शेयर रहे बुलंद

फाइल फोटो

खास बातें

  • सेंसेक्स में आधी फीसदी और निफ्टी में सिर्फ 0.05 अंक की तेजी रही, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन, मीडिया तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्र के सूचकांक में पांच फीसदी से अधिक तेजी रही।
मुंबई:

देश के शेयर बाजारों में गत सप्ताह मामूली तेजी रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में आधी फीसदी और निफ्टी में सिर्फ 0.05 अंक की तेजी रही, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन, मीडिया तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्र के सूचकांक में पांच फीसदी से अधिक तेजी रही।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स गत सप्ताह 0.54 फीसदी या 100.28 अंकों की तेजी के साथ शुक्रवार को 18,619.72 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी इसी अवधि में सिर्फ 0.05 अंक की तेजी के साथ 5,471.80 पर बंद हुआ।

गत सप्ताह सेंसेक्स के 30 में से 14 शेयरों में तेजी रही। सेसा गोवा (22.50 फीसदी), टीसीएस (10.67 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (8.29 फीसदी), विप्रो (7.92 फीसदी) और हीरो मोटोकॉर्प (6.79 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे ओएनजीसी (9.85 फीसदी), जिंदल स्टील (7.71 फीसदी), कोल इंडिया (7.15 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (5.63 फीसदी) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (4.11 फीसदी)।

गत सप्ताह बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप में एक फीसदी से अधिक गिरावट रही। मिडकैप 1.09 फीसदी गिरावट के साथ 5,300.40 पर और स्मॉलकैप 1.07 फीसदी तेजी के साथ 5,191.25 पर बंद हुआ।

गत सप्ताह बीएसई के 13 में से चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (6.40 फीसदी), प्रौद्योगिकी (5.06 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (3.52 फीसदी) और तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (0.77 फीसदी) में तेजी रही। गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे सार्वजनिक कंपनियां (4.54 फीसदी), बैंकिंग (4.51 फीसदी), रियल्टी (4.08 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (2.24 फीसदी) और पूंजीगत वस्तु (2.08 फीसदी)।

गत सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रमों में मंगलवार को देश की मुद्रा रुपये ने डॉलर के मुकाबले नए ऐतिहासिक निचले स्तर 66.25 को छू लिया। बुधवार को यह डॉलर के मुकाबले 68.85 के नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया।

बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 34,600 रुपये पर पहुंच गई। सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद जुलाई के बाद से सोने का आयात नहीं हुआ है। रुपये में गिरावट और सोने की आपूर्ति बाधित होने के कारण सोने की कीमत में वृद्धि दर्ज की गई।

विपक्ष द्वारा लगातार प्रधानमंत्री से देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर बयान की मांग करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि देश 1991 जैसे भुगतान संकट की तरफ नहीं बढ़ रहा है, जब आयात बिल का भुगतान करने के लिए देश का सोना गिरवी रखना पड़ा था। उन्होंने साथ ही कहा कि मौजूदा कारोबारी साल में देश की विकास दर 5.5 फीसदी रह सकती है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के पास अभी करीब 280 अरब डॉलर विदेशी पूंजी भंडार है, जिससे सात महीने तक आयात का खर्च उठाया जा सकता है। 1991 में देश के पास तीन अरब डॉलर का विदेशी पूंजी भंडार रह गया था, जिससे सिर्फ तीन सप्ताह के आयात का खर्च उठाया जा सकता था और देश को आयात बिल का भुगतान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास सोना गिरवी रखने को बाध्य होना पड़ा था।

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शुक्रववार को बाजार बंद होने के बाद आए ताजा आंकड़े में मौजूदा कारोबारी साल की पहली तिमाही में देश की विकास दर 4.4 फीसदी दर्ज की गई, जो जनवरी-मार्च 2009 से अब तक सबसे कम है।