खास बातें
- देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह के शुरू में कारोबार फीका रह सकता है। बाजार की नजर रिजर्व बैंक की नीतिगत समीक्षा बैठक के नतीजों पर रहेगी।
New Delhi: देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह के शुरू में कारोबार फीका रह सकता है। बाजार की नजर रिजर्व बैंक की नीतिगत समीक्षा बैठक के नतीजों पर रहेगी। निवेशकों को मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों का भी इंतजार होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से बाजार में गतिविधियां सुस्त रही हैं और प्रमुख सूचकांक एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रहे हैं। अप्रैल की औद्योगिक वृद्ध दर में नरमी और खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति के बढ़ने से आने वाले दिनों में कारोबारी धारणा प्रभावित हो सकती है। आईआईएफएल (इंडिया प्रा क्लाइंट) के शोध प्रमुख अमर अंबानी ने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक 16 जून को नीतिगत दरों में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति में तेजी बनी हुई है। ब्याज दरों में वृद्धि का कारोबार की लागत पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे में शेयर बाजार पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी सकारात्मक वैश्विक-संकेत बाजार के लिए उत्प्रेरक साबित हो सकता है। पिछले सप्ताह फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष बेन बर्नांके द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था के निराशाजनक आकलन के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दिखी। यूनान के वित्तीय स्वास्थ्य में गड़बड़ी के अनुमानों के बीच यूरोप में भुगतान संकट की समस्या से भी बाजार सहमे हुए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से भी पूंजी प्रवाह धीमा चल रहा है। बीते सप्ताह बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 107.94 अंक अथवा 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ सप्ताहांत में 18,268.54 अंक पर बंद हुआ। मारुति सुजुकी इंडिया के मानेसर संयंत्र में कर्मचारियों की हड़ताल के उत्तरी राज्यों के ऑटो क्षेत्र में फैलने की चिंताओं के कारण प्रमुख दोपहिया वाहन कंपनी हीरो होंडा मोटर्स के शेयर में करीब 7 प्रतिशत तक की गिरावट आई। बिकवाली का सर्वाधिक दबाव ऑटो, धातु और बैंकिंग क्षेत्रों में देखने के शेयरों में देखने को मिला।