खास बातें
- आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मई में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिल रही है। वैश्विक बाजारों में भी कमोबेश यही हाल है।
नई दिल्ली: शेयर बाजारों में यह पुरानी कहावत है कि मई के महीने में बिकवाली करो और शरद ऋतु तक बाजार से दूर रहो और फिर नए सिरे से लिवाली करो। घरेलू शेयर बाजार में यह कहावत चरितार्थ होती प्रतीत हो रही है, क्योंकि लगातार तीसरे साल बाजार मई में बुरी तरह टूटा है।
इस साल मई में अब तक बंबई शेयर बाजार का बीएसई 1,000 अंक से अधिक टूट चुका है और बाजार पूंजीकरण के लिहाज से दलाल स्ट्रीट को 4,00,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मई के महीने में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिल रही है। अनेक वैश्विक बाजारों में भी कमोबेश ऐसा ही है। मई 2010 के बाद बीते दो साल में शेयर बाजार को पूंजीकरण के लिहाज से लगभग 410 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है और इसमें से आधे से अधिक (210 अरब डॉलर) का नुकसान मई के महीने में हुआ है।
सभी सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्य आधार पर आकलन किया जाए तो मई, 2012 के बाद से शेयर बाजारों की संपत्ति लगभग चार लाख करोड़ रुपये (70 अरब डॉलर) घट चुकी है। अगर शेयर बाजार में गिरावट का मौजूदा रकम जारी रहता है, तो यह घाटा और बड़ा हो सकता है। इस महीने अब तक सेंसेक्स 1,100.99 अंक टूट चुका है।
इस समय सेंसेक्स 16,217.82 अंक पर है, जिसका मतलब उसकी संपत्ति 1,000 अरब डॉलर से कुछ अधिक (लगभग 58 लाख करोड़ रुपये) है। बीते सालों में भी मई का महीना वैश्विक स्तर पर शेयर बाजारों पर सबसे भारी पड़ता रहा है। यह अलग बात है कि 2009 तक भारतीय शेयर बाजारों में मई महीने में बिकवाली और लिवाली का मिला जुला रख देखने को मिलता था। मई 2011 में शेयर बाजार की संपत्ति लगभग 1.8 लाख करोड़ (60 अरब डॉलर) टूटी, जबकि मई 2010 में यह नुकसान दो लाख करोड़ रुपये (80 अरब डॉलर) रहा।
इससे पहले की बात की जाए तो मई 2009 में शेयर बाजार की संपत्ति में 13 लाख करोड़ रुपये या 285 अरब डॉलर की अच्छी खासी तेजी आई थी। जबकि मई 2008 में इसके बाजार पूंजीकरण में 160 अरब डॉलर की कमी आई।