यह ख़बर 25 मई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार : एफएंडओ परिपक्वता से उतार-चढ़ाव के आसार

मुंबई:

देश के शेयर बाजार में अगले सप्ताह वायदा और विकल्प (एफएंडओ) सौदे की परिपक्वता के कारण उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। मई के एफएंडओ सौदे गुरुवार 29 मई को परिक्व हो जाएंगे।

लोकसभा चुनाव के परिणाम आ जाने के बाद अब शेयर बाजार के निवेशकों की निगाह नई सरकार के प्रथम बजट पर रहेगी, जो मध्य जुलाई में पेश की जा सकती है। इस दौरान निवेशक पिछले दो-तीन महीने में राजग की स्पष्ट बहुमत से सरकार बनने की उम्मीद में किए गए रणनीतिक निवेश से पैंतरा बदलकर आगामी बजट को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति अपनाएंगे।

इस बीच विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) की दिशा, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमत भी शेयर बाजार को प्रभावित करेंगी।

अगले सप्ताह से निवेशकों की नजर कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले जनवरी-मार्च 2014 तिमाही और 2013-14 कारोबारी वर्ष के परिणामों की घोषणा पर भी टिकी रहेगी। निवेशक परिणामों के साथ आने वाले आय के अनुमानों से निवेश की रणनीति तय करेंगे। परिणाम जारी करने का दौर इस महीने के आखिर तक चलेगा।

सोमवार को ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, कैनरा बैंक, गेल और मुथूट फायनेंस, मंगलवार को डिश टीवी इंडिया, होटल लीला, जेट एयरवेज, नेटवर्क 18 मीडिया, ऑयल इंडिया और उषा मार्टिन, बुधवार को अपोलो हॉस्पीटल, बीईएमएल, एस्कॉर्ट्स, हीरो मोटोकॉर्प, इंद्रप्रस्थ गैस, जागरण प्रकाशन, पीवीपी वेंचर, सेल और सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड, गुरुवार को भेल, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन, कोल इंडिया, डीएलएफ, एमएमटीसी, ओएनजीसी और टाटा मोटर्स तथा शुक्रवार को बीजीआर एनर्जी और फ्यूचर रिटेल अपने परिणाम की घोषणा करेंगी।

भारतीय रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा घोषणा तीन जून को करेगा। बैंक ने एक अप्रैल की घोषणा में पिछली दरों को यथावत रखा था।

मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आगामी मानसून के मौसम (जून-सितंबर) में बारिश कम होने की भविष्यवाणी का प्रभाव भी शेयर बाजार पर देखा जा सकता है। मौसम कार्यालय की भविष्यवाणी के मुताबिक, मानसूनी बारिश पांच फीसदी की घट-बढ़ की मॉडल त्रुटि के साथ 89 सेंटीमीटर के दीर्घावधि औसत के 95 फीसदी रहने का अनुमान है।

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मानसून का देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होता है। इसके कमजोर रहने से कृषि प्रभावित हो सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और इससे अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। यह नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।