खास बातें
- विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पिछले कुछेक हफ्तों में सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट के बाद बाजार में कम कीमत पर लिवाली बढ़ सकती है।
New Delhi: आगामी सप्ताह शेयर बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों से तय होगी। बाजार 18 जून को समाप्त सप्ताह में गिरावट के साथ बंद हुआ और आगे की दिशा के लिए वैश्विक संकेतों पर निर्भर होना पड़ेगा, क्योंकि यूनान तथा यूरो क्षेत्र से संबंधित चिंताओं के कायम रहने के कारण सुधार की कमजोर संभावनाओं को देखते हुए बाजार में हताशा बनी रही। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पिछले कुछेक हफ्तों में सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट के बाद बाजार में कम कीमत पर लिवाली बढ़ सकती है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के सहायक सुरक्षा उपाध्यक्ष और तकनीकी शेयर के वरिष्ठ विश्लेषक पराग डॉक्टर ने कहा, आगामी सप्ताह में बाजार का रुख वैश्विक बाजार की घटनाओं और भारत सरकार की नीतियों से निर्धारित होगा। पिछले कुछेक हफ्तों में सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट के बाद बाजार में कम कीमत पर लिवाली बढ़ सकती है। निराशाजनक अमेरिकी आंकड़ों और यूनान के ऋण संकट की चिंताओं के बाद वैश्विक बाजार में कमजोरी के कारण समीक्षाधीन सप्ताह में बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक 398.01 अंक अथवा 2.17 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ सप्ताहांत में 17,870.53 अंक पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए रेपो और रिवर्स रेपो दर में चौथाई प्रतिशत (25 आधार अंक) की बढ़ोतरी की है। इसका भी कुछ असर बाजार पर पड़ सकता है। आईआईएफएल इंडिया के शोध प्रमुख अमर अंबानी ने कहा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंद होती गति और उभरते बाजारों में मौद्रिक सख्ती के उपाय शेयरों के लिए पर्याप्त चुनौतीपूर्ण परिदृश्य पैदा कर रहे हैं। भारत के लिए एक बड़ी समस्या यह है कि सरकारी मशीनरी ठहराव की स्थिति में फंस गया प्रतीत होता है। यूपीए-2 के लिए निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत मोर्चे पर जबर्दस्त पहल करनी होगी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में भारी गिरावट आई है और मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद व्यक्त की गई है। इन तथ्यों के कारण बाजार कुछ राहत की सांस ले सकता है जो दबाव में चल रहा है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, ऑटो, सीमेंट और धातु स्टॉक के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की प्रतिकूल रिपोर्ट के कारण सूचकांक में सर्वाधिक भारांश रखने वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में पिछले सप्ताह 8 प्रतिशत की गिरावट आई। दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 प्रतिशत घटकर 113 डॉलर प्रति बैरल रह जाने के बाद तेल विपणन कंपनियों में ताजा लिवाली देखी गई। बाजार विश्लेषकों ने उम्मीद जताते हुए कहा कि बाजार की स्थिति उतनी बुरी नहीं है, ऐसी स्थिति वैश्विक दबाव के कारण है। एक बार वैश्विक बाजार में तेजी का रुख दिखाई देना शुरू हो, तो घरेलू बाजार में भी अच्छी स्थिति कायम होने की संभावना है।