खास बातें
- सेबी की कार्यकारी निदेशक ऊषा नारायण ने कहा, हम विचार विमर्श की प्रक्रिया में हैं। अगली बोर्ड की बैठक में हम अधिग्रहण संहिता के मुद्दे को देखेंगे।
New Delhi: बाजार नियामक सेबी विलय एवं अधिग्रहण सौदों के लिए प्रस्तावित नयी संहिता पर इसी माह निर्णय करेगा। सेबी के निदेशक मंडल की बैठक इसी माह प्रस्तावित है, जिसमें इस पर विचार किया जाएगा। सेबी की कार्यकारी निदेशक उषा नारायण ने बुधवार को उद्योग मंडल एसोचैम के कार्यक्रम के मौके पर कहा, हम विचार विमर्श की प्रक्रिया में हैं। अगली बोर्ड की बैठक में हम अधिग्रहण संहिता के मुद्दे को देखेंगे। सी अचुतन की अध्यक्षता वाली सेबी की समिति ने पिछले साल जुलाई में अधिग्रहण दिशानिर्देशों का जो प्रस्ताव दिया था उसमें किसी इकाई द्वारा किसी कंपनी में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदने पर उसे शेष शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाना अनिवार्य होगा। वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाने की सीमा 15 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण है। सेबी ने अचुतन समिति की रिपोर्ट पर विभिन्न अंशधारकों के विचार मांगे थे। नारायणन ने कहा, जिन दो मुद्दों पर सबसे ज्यादा विचार मिले वे गैर प्रतिस्पर्धा शुल्क से जुड़े हैं। अपनी रपट में अचुतन समिति ने गैर प्रतिस्पर्धा शुल्क को समाप्त करने की सिफारिश की है। अधिग्रहण करने वाली कंपनी खरीदी गई कंपनी के प्रवर्तक को इस शुल्क का भुगतान करती है। विलय एवं अधिग्रहण सौदों में गैर प्रतिस्पर्धा शुल्क दिया जाता है। इसका मकसद यह होता है कि लक्षित कंपनी बाद में उसी कारोबार में न उतरे। कई बार यह शुल्क कुल सौदा मूल्य का 25 प्रतिशत तक हो जाता है। यदि समिति की रिपोर्ट को सेबी स्वीकार कर लेता है, तो खुली पेशकश सभी शेयरधारकों के लिए उपलब्ध होगी। प्रस्तावित नए दिशानिर्देशों में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए खुली पेशकश से सभी शेयरधारकों को कंपनी से निकलने और अपनी हिस्सेदारी के लिए उचित कीमत पाने का मौका मिल सकेगा। अभी खुली पेशकश 20 प्रतिशत शेयर पूंजी के लिए होती है। अचुतन समिति का गठन सितंबर, 2009 में किया गया था। इसका उद्देश्य देश में अगले 5-10 साल में अधिग्रहण के दिशनिर्देशों को आकार देना है।