खास बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से सिंगूर में किसानों को अभी जमीन नहीं लौटाने का निर्देश दिया है। यह टाटा मोटर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से सिंगूर में किसानों को जमीन नहीं लौटाने का निर्देश दिया है। यह टाटा मोटर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश आने तक किसानों को जमीन नहीं लौटाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह अंतरिम राहत है। कलकत्ता उच्च न्यायालय अपने समक्ष लंबित मामले में आगे की सुनवाई करेगा। पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगूर में टाटा मोटर्स को दी गई जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था। ये जमीन टाटा को नैनो कार का प्लांट लगाने के लिए दी गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले के खिलाफ टाटा ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी, पर हाईकोर्ट ने भी टाटा की अपील को खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ़ टाटा मोटर्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने एक विधेयक पारित कर ऐसे किसानों को उनकी जमीन लौटाने की बात कही थी, जो अपनी जमीन का अधिग्रहण नहीं कराना चाहते थे। सरकार के इस कदम को टाटा समूह ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने समूह के खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। मामले के महत्व को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से एक महीने में फैसला सुनाने को कहा है।न्यायाधीश पी सतशिवम तथा न्यायाधीश एके पटनायक ने कहा कि अंतरिम आदेश के तहत हम राज्य सरकार को यह निर्देश देते हैं कि कलकत्ता हाईकोर्ट के अगले आदेश तक वह किसानों को जमीन वापस नहीं लौटाए। पीठ ने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था है और वह मामले के गुण-दोष के बारे में कोई राय नहीं जता रही है। पीठ ने हाईकोर्ट से मामले में आगे की सुनवाई करने को कहा, जिसमें टाटा ने जमीन वापस लेने तथा उसे किसानों को वापस लौटाने को लेकर ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून को चुनौती दी है। राज्य सरकार की ओर से मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव ने कहा कि जब तक हाईकोर्ट मामले में फैसला नहीं दे देता, जमीन राज्य सरकार के कब्जे में रहेगी। इसके बाद पीठ ने कहा कि वह मामले में अंतरिम राहत दे रही है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह राजनीतिक मुद्दे का सवाल नहीं है, बल्कि अधिकारों से जुड़ा मामला है।