यह ख़बर 06 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

लाफार्ज को मेघालय में खनन की मिली अनुमति

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांसीसी सीमेंट कंपनी लाफार्ज को मेघालय में पूर्वी खासी की पहाड़ियों में चूना-पत्थर की खुदाई की अनुमति दे दी है।
New Delhi:

सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांसीसी सीमेंट कंपनी लाफार्ज को मेघालय में पूर्वी खासी की पहाड़ियों में चूना-पत्थर की खुदाई की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली विशेष वन पीठ ने मेघालय के वनों में खनन की अनुमति देने संबंधी लाफार्ज की याचिका को स्वीकार कर लिया। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अपनी संशोधित रपट में लाफार्ज की परियोजना को जो मंजूरी दी थी, न्यायालय ने उसे सही ठहराया है। न्यायालय ने कहा, हम मंत्रालय (के निर्णय) से संतुष्ट हैं, क्योंकि उसने पूरा निरीक्षण आदि कर लिया था। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस मामले में दी गई दो अलग-अगल रपट का कारण पूछने का कोई तुक नहीं बनता। उल्लेखनीय है कि सभी पक्षों की सुनवाई करने के बाद न्यायालय ने 10 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले 5 जनवरी, 2010 को उच्चतम न्यायालय ने लाफार्ज द्वारा मेघालय में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में चूना पत्थर के खनन पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पर्यावरण मंत्रालय ने पिछली अप्रैल में लाफार्ज को संशोधित पर्यावरणीय मंजूरी जारी की। उल्लेखनीय है कि लाफार्ज बांग्लादेश में छटक में 22.5 करोड़ डॉलर के निवेश से सुरमा सीमेंट परियोजना लगा रही है। यह कारखाना चूने-पत्थर के लिए पूरी तरह से भारत में पूर्वी खासी की पहाड़ियों में पाए जाने वाले चूना-पत्थर पर निर्भर करेगा। कंपनी वहां से 17 किलोमीटर लंबे कन्वेयर बेल्ट (घूमते पट्टे) के जरिए चूना-पत्थर को बांग्लादेश में अपने कारखाने तक भेजेगी।


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