खास बातें
- न्यायालय ने उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें भावी बिलिंग के बदले भुगतान किए गए 500 करोड़ रुपये के शुल्क का समायोजन करने का आग्रह किया गया था।
New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने इस्पात इंडस्ट्रीज और महाराष्ट्र की बिजली वितरण कंपनी एमएसईडीसीएल के कुछ अन्य औद्योगिक ग्राहकों की उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें भावी बिलिंग के बदले भुगतान किए गए 500 करोड़ रुपये के शुल्क का समायोजन करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली तीन जजों की एक पीठ ने कहा कि मामले की तेजी से सुनवाई की जाएगी। इस्पात इंडस्ट्रीज की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि औद्योगिक ग्राहकों ने बुरे वक्त में बढ़े हुए शुल्क का भुगतान कर एमएसईडीसीएल का सहयोग किया और कंपनी को अब यह राशि लौटानी चाहिए। उन्होंने कहा, हमारा मासिक बिल 80 करोड़ रुपये का है। उन्हें प्रति माह 10 करोड़ रुपये का समायोजन करने दें। इससे पहले, मामले में अंतरिम आदेश पारित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने 4 दिसंबर, 2010 को बिजली क्षेत्र के न्यायाधिकरण एप्टेल के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें ट्राइब्यूनल ने इस्पात इंडस्ट्रीज समेत औद्योगिक ग्राहकों से संग्रह किए गए 500 करोड़ रुपये विशेष शुल्क को रिफंड करने को कहा था।