एंटनी ने रक्षा क्षेत्र की नीति में इस बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'बड़ा खतरा' बताया
नई दिल्ली/ कोलकाता: सरकार ने जो एफडीआई सुधारों की घोषणा की है, उसे आरएसएस से संबद्ध एक संगठन ने जनता के भरोसे के साथ 'विश्वासघात' करार दिया है। वहीं विपक्षी पार्टियों ने रक्षा क्षेत्र की नीति में 'व्यापक' बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'बड़ा खतरा' बताया। कांग्रेस ने इस फैसले को वापस लेने की मांग की।
'FDI सुधार घबराहट में व्यक्त प्रतिक्रिया'
कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सुधार 'घबराहट में व्यक्त प्रतिक्रिया' हैं। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि अगर रघुराम राजन ने आरबीआई गवर्नर पद के लिए अपने दूसरे कार्यकाल की मनाही नहीं की होती तो यह नहीं किया जाता। सरकार ने हालांकि कहा कि सुधार पहल का राजन के फैसले के साथ कोई लेना-देना नहीं है।
'मेक इन इंडिया' के नाम पर 'ब्रेकिंग इंडिया'
वहीं सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई 'खतरनाक' है। उन्होंने कहा कि बेहद कम देश हैं जिन्होंने इस संवेदनशील क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी दी है। बड़े सुधार का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' के नाम पर मोदी सरकार 'ब्रेकिंग इंडिया' कर रही है।
'स्थानीय व्यापारियों को तबाह कर देगी नई FDI नीति'
इसके अलावा आरएसएस से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने कहा कि एफडीआई सुधारों का लक्ष्य नौकरियां पैदा करना नहीं है। उसने कहा, 'इसका लक्ष्य भारतीय लोगों से रोजगार छीनना है। यह स्थानीय व्यापारियों को तबाह कर देगा।' एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, 'खुदरा, रक्षा और फार्मा जैसे क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलना और मानदंडों में ढील देना देश की जनता के साथ विश्वासघात है। ऐसा करके सरकार ने देश के लिए और खासतौर पर स्थानीय व्यापारियों के लिए अच्छा नहीं किया है।'
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने एक कठोर शब्दों वाले बयान में कहा कि रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति का मतलब है कि इसने नाटो-अमेरिकी रक्षा निर्माताओं के हाथ में बहुत कुछ डाल दिया है। एंटनी ने कहा कि एफडीआई नीति में 'व्यापक' बदलाव ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए बड़ा खतरा पेश किया है। उन्होंने कहा, 'स्वाभाविक तौर पर यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी प्रभावित करेगा। यह राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पहुंचाएगा। इसके अलावा, इसका देश में स्वदेशी रक्षा शोध गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि इस बात पर गौर करना 'बेहद महत्वपूर्ण' है कि ये सारे बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा के तत्काल बाद किए गए हैं।
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