यह ख़बर 25 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

आरआईएल के केजी-डी6 अनुबंध में दंड का प्रावधान ही नहीं : समिति

खास बातें

  • समिति से कहा, अनुबंध खत्म होने के अलावा मंजूरी क्षेत्र विकास योजना या सालाना कार्यक्रम और बजट में उत्पादन लक्ष्य प्राप्त न कर पाने के मामले में पीएससी दंड का कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है।
नई दिल्ली:

रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी6 क्षेत्र का उत्पादन घटने के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक संसदीय समिति से कहा कि उक्त क्षेत्र से जुड़े उत्पादन भागीदारी अनुबंध (पीएससी) में उत्पादन लक्ष्य में कमी के मामले में दंड का कोई प्रावधान नहीं है। मंत्रालय ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस से जुड़ी स्थायी समिति से कहा, अनुबंध खत्म होने के अलावा मंजूरी क्षेत्र विकास योजना या सालाना कार्यक्रम और बजट में उत्पादन लक्ष्य प्राप्त न कर पाने के मामले में पीएससी दंड का कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है। समिति ने पिछले सप्ताह संसद में अपनी रपट पेश की। समिति को सौंपी गई प्रस्तुति के अलावा मंत्रालय आरआईएल द्वारा केजी-डी6 से गैस उत्पादन के अनुपात में व्यय की वसूली की राशि को भी सीमित करना चाहता है क्योंकि उसका मानना है कि उत्पादन में 40 फीसद गिरावट इसलिए हुई कि कंपनी ने पर्याप्त मात्रा में तेल कूपों को उत्खनन नहीं किया। ऐसी पहल की आशंका के बीच आरआईएल ने 24 नवंबर को एक पंचाट नोटिस जारी किया था और इस मामले को कानूनी तौर पर सुलझाने की मांग की थी। मंत्रालय ने पिछले सप्ताह इस नोटिस का जवाब देने के लिए 31 जनवरी तक का समय मांगा था। समिति ने अपनी रपट में पीएससी में दंड का विशिष्ट प्रावधान न होने पर आश्चर्य जाहिर किया और सरकार व उसकी उत्खनन तकनीकी शाखा डीजीएच (हाईड्रोकार्बन महानिदेशालय) से विभिन्न परिचालकों के साथ किए गए पीएससी अनुबंधों की समीक्षा करने और मंजूरी योजना के उल्लंघन के लिए सख्त प्रावधान शामिल करने के लिए कहा। पीएससी के तहत परिचालकों को 100 फीसद उत्खनन और उत्पादन लागत वसूल करने का प्रावधान है और यह उत्पादन की लागत वसूली से जुड़ा नहीं है।


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