यह ख़बर 22 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रीयल एस्टेट विधेयक का मसौदा पक्षपाती : फिक्की

खास बातें

  • फिक्की ने कहा कि मसौदा रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) विधेयक, 2011 में सभी सम्बद्ध पक्षों पर समान रूप से ध्यान नहीं दिया गया है।
नई दिल्ली:

उद्योग संगठन फिक्की ने गुरुवार को कहा कि मसौदा रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) विधेयक, 2011 में सभी सम्बद्ध पक्षों पर समान रूप से ध्यान नहीं दिया गया है। इसने सरकार से मांग की है कि बिल्डरों के लाभ के लिए इसमें संशोधन किया जाए। फिक्की की रीयल एस्टेट समिति के सह-अध्यक्ष प्रणय वकील ने संवाददाताओं को बताया, अगर मंजूरी मुद्दों के चलते परियोजना में देरी होती है तो डेवलपर को सजा क्यों? मशीनरी के स्तर पर भी जवाबदेही होनी चाहिए और नियामक को इस पहलू पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रीयल एस्टेट परियोजनाओं में सरकारी एजेंसियों तथा केंद्र, राज्य व नगरपालिका स्तर पर निकाय आदि अन्य भागीदारों से भी समान व्यवहार किया जाना चाहिए। वकील ने कहा कि मसौदा विधेयक के अनुसार डेवलपर को सभी मंजूरी हासिल करने तक ग्राहक से किसी तरह का अग्रिम लेने की अनुमति नहीं होगी। इससे इस क्षेत्र में काले धन का प्रवाह की राह खुल सकती है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com