यह ख़बर 30 मई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

'मुद्रास्फीति, चालू खाते के घाटे में नियंत्रण पर ध्यान देगा रिजर्व बैंक'

खास बातें

  • रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा, ‘‘वृद्धि दर काफी नरम पड़ चुकी है, मुद्रास्फीति शीर्ष पर पहुंचने के बाद नीचे है, लेकिन इसके फिर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। वहीं, भुगतान संतुलन का दबाव है और निवेश को भी बढ़ाना है।’’
अहमदाबाद:

नीतिगत दरों में और कटौती की उम्मीद पर पानी फेरते हुए रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम बना हुआ है और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना उसकी प्राथमिकता होगी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा, ‘‘वृद्धि दर काफी नरम पड़ चुकी है, मुद्रास्फीति शीर्ष पर पहुंचने के बाद नीचे है, लेकिन इसके फिर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। वहीं, भुगतान संतुलन का दबाव है और निवेश को भी बढ़ाना है।’’ सुब्बाराव ने कहा कि मुद्रास्फीति ‘अब भी ऊंची’ है और भारत में वृद्धि दर भले ही घट रही हो, मुद्रास्फीति नहीं घट रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक कीमतें खासकर जिंसों के दाम पिछले कुछ महीनों में निश्चित तौर पर नरम हुए हैं, लेकिन कीमतों में नरमी को हम हल्के में नहीं ले सकते।’’ जहां थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर तीन साल के निचले स्तर 4.89 प्रतिशत पर आ गई, खुदरा मुद्रास्फीति 9.39 प्रतिशत की उंचाई पर बनी रही। सुब्बाराव ने कहा कि चालू खातें के उंचे घाटे की वजह से रुपया कमजोर हो रहा है।

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उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक 17 जून को मध्य.तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा। अपनी पिछली समीक्षा में रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।