यह ख़बर 23 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक ने सीआरआर में आधा फीसदी की कटौती की

खास बातें

  • रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और अन्य दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि कर्ज की दरें यथावत बनी रहेंगी।
मुंबई:

रिजर्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि की आवश्यकता और कीमत स्थिरता के बीच संतुलन साधने के नाजुक काम को अंजाम देते हुए आज नीतिगत ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखा पर बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक धन सुलभ कराने के उपाय के तौर पर नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) आधा प्रतिशत कम कर दिया।

सीआरआर को छह से घटा कर 5.5 प्रतिशत करने से वाणिज्यिक बैंकों के पास ऋण देने के लिए 32,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। सीआरआर में कमी 28 जनवरी से प्रभावी हो जाएगी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मुंबई में वाणिज्यिक बैंकों के साथ बैठक में चालू वित्त वर्ष की मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा करते हुए अपनी अल्पकालिक उधार दर रेपो, 8.5 प्रतिशत पर स्थिर रखने की घोषणा की। इसके आधार पर बैंक की रिवर्स रेपो दर भी 7.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी।

उद्योग व्यापार क्षेत्र ने अर्थव्यस्था में नरमी का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक से नीतिगत ब्याज दरों में कमी की पुरजोर अपील की थी। बैंक ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति की मौजूदा ऊंचाई तथा दमित मुद्रास्फीति को देखते हुए नीतिगत ब्याज दरों में अभी कमी करना जल्दबाजी होगी।’’ दमित मुद्रास्फीति से मतलब सरकारी मूल्य नियंत्रण के प्रभाव से है।

बैंक ने कहा है कि सीआरआर बाजार में नकदी बढाने का एक स्थायी तरीका है। ‘‘सीआरआर में कमी को इस रूप में भी देखा जा सकता है कि भविष्य में ब्याज दरों में कमी लाने का रिजर्व बैंक का रुख और मजबूत हुआ है।’’ उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक सीआरआर के रूप में बैंकों के पास जमा राशि का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से अपने नियंत्रण में रखता है और इस पर बैंकों को ब्याज नहीं मिलता। रिजर्व बैंक ने अपनी पिछली मध्यतिमाही समीक्षा में कहा था कि ब्याज दरों में वृद्धि का मौजूदा दौर अब अपने चरम पर है। आगे ब्याज में कमी का दौर शुरू हो सकता है।

केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए फौरी उधार की सुविधा (एलएएफ) के अतिरिक्त अल्प स्थायी सुविधा पर ब्याज को 9.5 प्रतिशत और अपनी दीर्घकालिक ब्याज दर- बैंक दर को छह प्रतिशत पर बनाए रखा है। रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनके पास नकदी की दैनिक कमी के पूरा करने के लिए उधार देता है। जबकि रिवर्स रेपो के जरिए रिजर्व बैंक बैंकों के पास उपलब्ध नकदी को लेने के लिए अल्पकालिक उधारी लेता है। कुछ घंटों से लेकर एक दिन तक का यह लेनदेन रेपो और रिवर्स रेपो दर पर होता है।

सीआरआर में कटौती के बाद नकदी बढ़ने पर अब बैंक ग्राहकों को ऋण के लिए आकर्षित करने हेतु ब्याज दरें नरम कर सकते हैं।
अर्थव्यवस्था के हालात पर निगाह डालते हुए रिजर्व बैंक ने मार्च 2012 में समाप्त हो रहे वर्तमान वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान को घटा कर सात प्रतिशत कर दिया। पहले 7.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान था।

बैंक ने कहा है कि उसने जो नीतिगत रुख अपना रखा है उसका उद्देश्य, ‘‘आर्थिक वृद्धि के संकट को कम करना तथा कीमतों में वृद्धि की प्रत्याशाओं पर बंधन कसे रखना है।’’ केंद्रीय बैंक का कहना है कि सीआरआर में कटौती का असर कई गुणा होता है और मौजूदा कदम से आने वाले समय में बैंकिंग प्रणाली में 1.6 लाख करोड़ रुपये के ऋणों का सृजन हो सकेगा।

रिजर्व बैंक के रुख से शेयर बाजार में नई उम्मीद दिखा। सीआरआर में कटौती की खबर से बैंकों के शेयर उछाल पर थे। रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा इस साल के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होगी। इसके बारे में रिजर्व बैंक 17 अप्रैल को अपनी सालाना मौद्रिक नीति पेश करते समय अनुमान जाहिर करेगा।

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आर्थिक वृद्धि के बारे में रिजर्व बैंक के इस वक्तव्य से उसकी नई सोच का संकेत मिलता है। इससे पहले दिसंबर मध्य तक केन्द्रीय बैंक केवल महंगाई को काबू में लाने के एकमात्र एजेंडे के साथ काम कर रहा था। रिजर्व बैंक ने इससे पहले मार्च 2010 से लेकर अक्तूबर 2011 तक रेपो और रिवर्स रेपो दरों में लगातार वृद्धि कर इनमें 3.75 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी थी। इस वृद्धि के साथ रेपो दर 8.5 प्रतिशत और तदनुसार एक प्रतिशत का अंतर रखते हुए रिवर्स रेपो दर 7.5 प्रतिशत हो गई। फिलहाल ये दरें इसी स्तर पर हैं।