यह ख़बर 03 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कृषि क्षेत्र को रियायती दरों पर ऋण खत्म करने के पक्ष में आरबीआई

खास बातें

  • रिजर्व बैंक ने कृषि क्षेत्र को रियायती ब्याज दरों पर ऋण की व्यवस्था खत्म करने का पक्ष लिया है। आरबीआई का मानना है कि कृषि क्षेत्र के लिए समय पर ऋण उपलब्ध हो, यह अधिक महत्वपूर्ण है।
पुणे:

रिजर्व बैंक ने कृषि क्षेत्र को रियायती ब्याज दरों पर ऋण की व्यवस्था खत्म करने का पक्ष लिया है। आरबीआई का मानना है कि कृषि क्षेत्र के लिए समय पर ऋण उपलब्ध हो, यह अधिक महत्वपूर्ण है।  भारतीय कृषि में उत्पादकता पर एक राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा, ऋण की ब्याज दर बाजार के आधार पर तय किए जाने की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि समुदाय के सभी वर्गों तक प्रभावी तरीके से ऋण का प्रवाह हो। उन्होंने सुझाव दिया, हमारा जोर रियायती दरों पर ऋण के बजाय समय पर और पर्याप्त मात्रा में उचित लागत पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए। खासकर वहां, जहां ऋण की डिलीवरी प्रणाली बहुत कमजोर एवं जटिल है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार अल्पकालिक फसल ऋण पर 2 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराती है। किसानों को अल्पकालिक फसल ऋण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध है। चक्रवर्ती ने कहा कि ऋण के सही इस्तेमाल के लिए इसकी सावधानीपूर्वक निगरानी करना भी महत्वपूर्ण है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इसका सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। ऋण की निगरानी केवल फसलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए भी ऋण की निगरानी की जानी चाहिए।


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